कच्चा तेल सस्ता, फिर महंगा क्यों पेट्रोल? ट्रंप ने तेल कंपनियों को दी कड़ी चेतावनी, जांच के भी दिए आदेश
वाशिंगटन: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश की तेल कंपनियों और पेट्रोल रिटेलर्स पर तीखा हमला बोला है। ट्रंप ने ईंधन कंपनियों को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तत्काल कमी करने की चेतावनी देते हुए आरोप लगाया कि वे आम उपभोक्ताओं को राहत देने के बजाय अनुचित मुनाफाखोरी कर रही हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ते हैं, तब ईंधन कंपनियां बहुत तेजी से खुदरा कीमतें बढ़ा देती हैं। लेकिन अब जबकि कच्चे तेल की कीमतें घटकर करीब 68 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई हैं, तब भी उपभोक्ताओं को उसका लाभ नहीं मिल रहा है।
‘आम लोगों को मिले सस्ते तेल का फायदा’
ट्रंप ने सोशल मीडिया और आधिकारिक बयानों के जरिए तेल कंपनियों को निशाने पर लेते हुए कहा कि अमेरिकी नागरिकों को सस्ते कच्चे तेल का सीधा लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने कंपनियों पर ‘प्राइस गॉजिंग’ यानी अत्यधिक मुनाफाखोरी का आरोप लगाया और कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में ईंधन की कीमतों में कटौती की जानी चाहिए।
उनका कहना है कि तेल बाजार में आई गिरावट के बावजूद यदि खुदरा कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो इसका बोझ सीधे आम जनता पर पड़ता है।
न्याय विभाग को जांच के निर्देश
राष्ट्रपति ट्रंप ने केवल बयानबाजी तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि मामले की जांच के लिए अमेरिकी न्याय विभाग को निर्देश भी दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कंपनियां कीमतों में कमी नहीं करतीं और अनियमितताएं सामने आती हैं, तो कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
इस कदम को ट्रंप प्रशासन की ओर से ऊर्जा क्षेत्र पर बढ़ते दबाव के रूप में देखा जा रहा है।
तेल कंपनियों पर अरबों डॉलर मुनाफा कमाने का आरोप
रिपोर्टों के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के दौर में अमेरिका में ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। इसी अवधि में कई बड़ी तेल कंपनियों ने भारी मुनाफा अर्जित किया।
ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि संकट के समय हुई अतिरिक्त कमाई का उपयोग उपभोक्ताओं को राहत देने के बजाय शेयरधारकों को लाभ पहुंचाने और कॉर्पोरेट लाभ बढ़ाने में किया गया।
तेल उद्योग ने दी अपनी सफाई
राष्ट्रपति के आरोपों के बाद तेल उद्योग से जुड़े संगठनों और कंपनियों ने भी अपना पक्ष रखा है। उनका कहना है कि पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें केवल कच्चे तेल के भाव पर निर्भर नहीं होतीं।
उद्योग के मुताबिक रिफाइनिंग लागत, आपूर्ति श्रृंखला, परिवहन खर्च, स्थानीय कर और क्षेत्रीय बाजार स्थितियां भी ईंधन की अंतिम कीमत तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
रिफाइनिंग लागत और टैक्स भी बड़ी वजह
तेल उद्योग का कहना है कि कच्चे तेल को पेट्रोल और डीजल में बदलने की प्रक्रिया में भी पर्याप्त लागत आती है। इसके अलावा कुछ अमेरिकी राज्यों में स्थानीय स्तर पर लगाए गए करों का भी ईंधन कीमतों पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
विशेष रूप से कैलिफोर्निया जैसे राज्यों में ऊंचे टैक्स के कारण खुदरा कीमतों में अपेक्षित गिरावट नहीं आ पाती।
महंगाई के बीच बढ़ा राजनीतिक दबाव
अमेरिका में ईंधन की कीमतें और महंगाई इस समय प्रमुख राजनीतिक मुद्दों में शामिल हैं। परिवहन लागत बढ़ने से खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा के सामान की कीमतों पर भी असर पड़ रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि आम उपभोक्ताओं पर बढ़ते आर्थिक दबाव के बीच ट्रंप प्रशासन अब ईंधन कीमतों को लेकर अधिक आक्रामक रुख अपना रहा है, ताकि लोगों को राहत देने का संदेश दिया जा सके।





