शी जिनपिंग के भारत दौरे से पहले सीमा पर हलचल, अरुणाचल में तनाव के बीच चीन की रणनीति पर उठे सवाल
बीजिंग: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की प्रस्तावित भारत यात्रा से पहले अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र में सैन्य तनाव की खबरों ने दोनों देशों के संबंधों को लेकर चर्चा तेज कर दी है। शीर्ष स्तर की बातचीत से पहले सीमा पर बढ़ती गतिविधियों को चीन की कूटनीतिक रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है।
भारत और चीन के बीच उच्चस्तरीय वार्ता से पहले सीमा पर तनाव का इतिहास रहा है। चीन पर आरोप लगते रहे हैं कि वह बातचीत की मेज पर आने से पहले सीमाई इलाकों में दबाव बढ़ाकर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश करता है। राजनयिक स्तर पर संवाद जारी रखने के साथ सैन्य मोर्चे पर दबाव बनाए रखना उसकी रणनीति का हिस्सा माना जाता रहा है।
अमेरिका से रिश्तों में उतार-चढ़ाव के बीच चीन की नजर
अरुणाचल प्रदेश के ताक्सिंग क्षेत्र में सामने आई सैन्य हलचल को भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में आए उतार-चढ़ाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। बीजिंग भारत के वैश्विक रणनीतिक संबंधों पर लगातार नजर रखता है। अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ भारत के संबंधों में किसी तरह का दबाव या मतभेद सामने आने पर चीन हिमालयी सीमा पर अपनी गतिविधियां बढ़ाकर भारत पर रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर सकता है।
शी की यात्राओं से पहले भी सीमा पर बढ़ा तनाव
भारत और चीन के बीच पिछले वर्षों में ऐसे कई मौके आए हैं, जब दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व की मुलाकातों या महत्वपूर्ण वार्ताओं से पहले सीमा पर तनाव देखने को मिला।
दोकलम 2017 में 73 दिन चला गतिरोध
2017 में दोकलम क्षेत्र में भारत और चीन की सेनाएं करीब 73 दिनों तक आमने-सामने रही थीं। अगस्त में गतिरोध समाप्त हुआ था। इसके कुछ ही सप्ताह बाद सितंबर में चीन में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात हुई थी। सीमा पर तनाव के बावजूद दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संवाद जारी रहा था।
गलवां 2020 के बाद लंबे समय तक चला तनाव
2020 में पूर्वी लद्दाख में चीनी सैनिकों की गतिविधियों के बाद गलवां में दोनों देशों की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हुई थी। इसके बाद भारत और चीन के बीच सैन्य तथा राजनयिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई। 2024 में देपसांग और डेमचोक में पेट्रोलिंग को लेकर समझौते के बाद ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात हुई थी।
तवांग 2022 में भी हुई थी सैनिकों में झड़प
दिसंबर 2022 में तवांग सेक्टर में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच झड़प हुई थी। इसके बाद सैन्य और कूटनीतिक माध्यमों से बातचीत के जरिए स्थिति को नियंत्रित किया गया था। ऐसे में ताक्सिंग क्षेत्र में मौजूदा हलचल को भी भारत-चीन संबंधों के इसी लंबे घटनाक्रम के संदर्भ में देखा जा रहा है।
सीमा विवाद के बीच कारोबार बढ़ाने की कोशिश
अरुणाचल प्रदेश में चीनी गतिविधियों को लेकर दावों के बीच भारत और चीन के व्यापारिक संबंधों में भी नए समीकरण दिखाई दे रहे हैं। शी जिनपिंग के अगले महीने ब्रिक्स सम्मेलन के लिए भारत आने की संभावना के बीच द्विपक्षीय बातचीत में भारतीय दवाओं, कृषि उत्पादों और अन्य वस्तुओं के लिए चीन के बाजार में अधिक पहुंच का मुद्दा उठ सकता है।
भारत चीन से स्मार्टफोन के कल-पुर्जे, सेमीकंडक्टर, लिथियम-आयन बैटरी, सौर पैनल, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, केबल, प्लास्टिक और पॉलिमर जैसे उत्पाद आयात करता है। दूसरी ओर, भारत चीन को लौह अयस्क, पेट्रोलियम उत्पाद, कार्बनिक रसायन, कृषि और खाद्य उत्पाद, समुद्री उत्पाद, धातु तथा रत्न-जवाहरात निर्यात करता है।
शी जिनपिंग की प्रस्तावित भारत यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव और आर्थिक संबंधों को लेकर अलग-अलग स्तर पर बातचीत जारी है। ऐसे में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान होने वाली संभावित द्विपक्षीय वार्ता पर भारत और चीन के साथ-साथ क्षेत्रीय रणनीतिक घटनाक्रम पर नजर रखने वालों की भी निगाह रहेगी।





