होर्मुज संकट गहराया, जहाजों की आवाजाही लगभग ठप; महंगा हुआ तेल, क्या दुनिया पर मंडरा रहा मंदी का खतरा?
नई दिल्ली: होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही एक बार फिर बेहद कम हो गई है। संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान पर अपने दो जहाजों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। वहीं, अमेरिका की ओर से संकेत दिया गया है कि ईरान पर नौसैनिक नाकेबंदी लंबे समय तक जारी रह सकती है। इसी बीच ईरानी संसद की एक समिति ने अमेरिका, इजरायल और अन्य दुश्मन देशों के जहाजों को होर्मुज से गुजरने से रोकने की योजना को मंजूरी दी है।
संकट का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आपूर्ति पर पड़ रहा है। भारत की रूसी कच्चे तेल पर निर्भरता भी जुलाई में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। वैश्विक अर्थशास्त्रियों को आशंका है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो आर्थिक विकास की रफ्तार कमजोर पड़ सकती है और कुछ क्षेत्रों में मंदी का खतरा बढ़ सकता है।
ट्रंप ने होर्मुज को अमेरिकी क्षेत्र बनाने की दी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि ईरान को हराने के बाद अमेरिका जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिकी क्षेत्र घोषित कर सकता है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के कुल तेल और गैस का करीब पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता था।
ट्रंप के बयान से ईरान के साथ तनाव और बढ़ गया है। ईरान अमेरिका के दावे को खारिज करता रहा है। उसका कहना है कि जब तक उसकी शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक यह जलमार्ग नहीं खोला जाएगा।
यूएई के दो जहाजों पर हमले का आरोप
अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के मुताबिक, गुरुवार शाम होर्मुज से गुजर रहे उसके दो जहाजों पर हमला हुआ। यूएई सरकार ने इस घटना के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, ईरान की ओर से इस आरोप पर अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
एक ईरानी अधिकारी के अनुसार, जून में हुए समझौते को आगे बढ़ाने को लेकर बातचीत में कोई प्रगति नहीं हुई है। जून में युद्धविराम टूटने के बाद से ईरान उन जहाजों पर हमले कर रहा है, जो उसकी अनुमति के बिना इस जलमार्ग से गुजरने की कोशिश करते हैं।
एक दिन में सिर्फ दो जहाज गुजरे
जहाजों की निगरानी करने वाली कंपनी क्प्लर के अनुसार, शुक्रवार को सिर्फ दो जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे। इनमें एक अनाज ले जाने वाला जहाज ईरानी जलक्षेत्र में दाखिल हुआ, जबकि दूसरा खाली जहाज विपरीत दिशा में गया। एक खाली तेल टैंकर भी खाड़ी की तरफ जाता दिखाई दिया।
शुक्रवार को किसी कच्चे तेल वाले जहाज की आवाजाही नहीं हुई। इससे एक दिन पहले गुरुवार को नौ जहाज इस मार्ग से गुजरे थे, जबकि बुधवार को पांच जहाजों ने रास्ता पार किया था। हालांकि, अगस्त के औसत 12 जहाज प्रतिदिन की तुलना में यह संख्या अभी भी कम है।
कुछ जहाज अपने संकेत प्रसारित करने वाले उपकरण बंद करके भी यात्रा कर सकते हैं, इसलिए वास्तविक आवाजाही इससे अलग हो सकती है। इसके बावजूद मौजूदा स्थिति युद्ध से पहले के मुकाबले बेहद अलग है। उस समय रोजाना 130 से अधिक जहाज इस जलमार्ग से गुजरते थे।
अमेरिका बोला- लंबे समय तक जारी रह सकती है नाकेबंदी
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिकी सेना क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बनाए रखने और ईरान पर नाकेबंदी लागू करने में पूरी तरह सक्षम है। उनके मुताबिक, अमेरिकी नौसेना अपने जहाजों को बदल-बदलकर लंबे समय तक नाकेबंदी जारी रख सकती है।
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने भी ईरान पर आर्थिक दबाव और बढ़ाने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि अगले सप्ताह ऐसे कदमों की घोषणा की जाएगी, जो किसी देश को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने के लिए अमेरिका की ओर से अब तक उठाए गए कदमों से भी आगे होंगे।
महंगे पेट्रोल का असर ट्रंप की लोकप्रियता पर
अमेरिका में युद्ध को लेकर घरेलू दबाव भी बढ़ रहा है। पेट्रोल की बढ़ती कीमतों का असर राष्ट्रपति ट्रंप की लोकप्रियता पर पड़ रहा है। नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों में इसका असर रिपब्लिकन पार्टी की संसद में स्थिति पर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
ब्रेंट कच्चे तेल और अमेरिकी कच्चे तेल की कीमतें मामूली बढ़त के साथ क्रमशः करीब 87 डॉलर और 81 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई हैं। भारत की रूसी कच्चे तेल पर निर्भरता जुलाई में रिकॉर्ड स्तर पर रही। वहीं, एशिया की रिफाइनरियों ने भविष्य की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए इस सप्ताह अमेरिकी कच्चे तेल की भी खरीदारी की है।
ईरान की मांग- प्रतिबंध हटें और जब्त संपत्ति लौटे
ईरान की मांग है कि उस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं और उसकी जब्त संपत्तियां वापस की जाएं। गुरुवार को ईरानी संसद की एक समिति ने उस योजना को मंजूरी दी, जिसके तहत अमेरिका, इजरायल और अन्य दुश्मन देशों के जहाजों तथा उपकरणों को होर्मुज से गुजरने से रोका जा सकेगा।
अमेरिका ने जून के मध्य में ईरान पर लगी नाकेबंदी को एक महीने के लिए हटाया था, लेकिन बाद में इसे दोबारा लागू कर दिया। इससे ईरान की विदेशी मुद्रा कमाने का प्रमुख जरिया प्रभावित हुआ है। इससे पहले युद्ध के दौरान उसके ऊर्जा ढांचे पर हुए हमलों ने भी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है।
अमेरिका पहले कह चुका है कि नाकेबंदी तभी हटाई जाएगी, जब ईरान और ओमान व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही बहाल करने पर सहमत होंगे।
हूती हमले से क्षेत्रीय युद्ध फैलने की आशंका
ट्रंप ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज करने की चेतावनी दे चुके हैं। हालांकि, उन्होंने अभी तक जमीनी सेना भेजने, रणनीतिक द्वीपों पर कब्जा करने या समुद्री जल शोधन संयंत्रों पर हमला करने से परहेज किया है। इस सप्ताह की शुरुआत में उन्होंने सैन्य कार्रवाई के बजाय आर्थिक दबाव को प्राथमिकता देने के संकेत दिए थे।
अमेरिका ने ईरान और उन लोगों तथा संस्थाओं पर भी प्रतिबंध कड़े किए हैं, जिन पर ईरान को हथियार हासिल करने में मदद करने का आरोप है। हालांकि, इन दबावों के बावजूद ईरान अभी बातचीत की मेज पर वापस नहीं आया है।
इसी बीच गुरुवार को ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने ड्रोन से सऊदी अरामको की एक रिफाइनरी को निशाना बनाया। इस घटना के बाद संघर्ष के दूसरे देशों तक फैलने की आशंका एक बार फिर बढ़ गई है।
लंबा चला संकट तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बढ़ेगा दबाव
होर्मुज जलडमरूमध्य से बड़ी मात्रा में तेल और एलएनजी की आपूर्ति होती है। ऐसे में यदि यहां लंबे समय तक जहाजों की आवाजाही बाधित रहती है तो ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने के साथ कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है।
वैश्विक अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि यदि संघर्ष जल्द खत्म नहीं हुआ तो दुनिया की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार में तेज गिरावट आ सकती है। लंबे समय तक ऊर्जा आपूर्ति बाधित रहने की स्थिति में कुछ क्षेत्रों में मंदी का खतरा भी बढ़ सकता है।





