NTA कैसे तैयार करता है प्रश्नपत्र? क्वेश्चन बैंक से लेकर प्रिंटिंग और पैकिंग तक ऐसे होता है पूरा प्रोसेस

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नई दिल्ली: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए की ओर से आयोजित परीक्षाओं के प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया कई चरणों से होकर गुजरती है। हर चरण में अलग-अलग विशेषज्ञों की भूमिका होती है, ताकि किसी एक व्यक्ति को पूरे प्रश्नपत्र की जानकारी न हो। परीक्षा में जितने प्रश्नों की जरूरत होती है, उससे करीब पांच गुना अधिक प्रश्नों का बैंक तैयार किया जाता है। इसके बाद प्रश्नों और उनके उत्तरों की कई स्तरों पर जांच की जाती है।

यूजीसी-नेट के तीन विषयों में मिली थी गड़बड़ी

यूजीसी-नेट के तीन विषयों के प्रश्नपत्र में गड़बड़ी सामने आने के बाद एनटीए ने इन विषयों की परीक्षा दोबारा कराने का फैसला किया है। एनटीए साल में दो बार यूजीसी-नेट परीक्षा आयोजित करता है और इसमें 87 विषय शामिल हैं। अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र के प्रश्नपत्रों में कमियां पाए जाने के बाद अभ्यर्थियों ने विरोध किया और एनटीए से शिकायत की।

ऐसे में प्रश्नपत्र तैयार करने की पूरी प्रक्रिया एक बार फिर चर्चा में है। सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में प्रश्नपत्र तैयार करने के अलग-अलग चरणों की जानकारी दी गई है।

सबसे पहले तैयार होता है क्वेश्चन बैंक

प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया की शुरुआत प्रश्नों के बैंक से होती है। प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों के विशेषज्ञ प्रश्न तैयार करते हैं। इन विशेषज्ञों को यह जानकारी नहीं होती कि उनके तैयार किए गए प्रश्नों में से कौन सा सवाल अंतिम प्रश्नपत्र में शामिल किया जाएगा।

सरकार की ओर से दाखिल हलफनामे के मुताबिक, प्रश्न बैंक में परीक्षा के लिए जरूरी प्रश्नों की संख्या से पांच गुना अधिक प्रश्न रखे जाते हैं। इसके बाद इन प्रश्नों को मॉडरेटर के पास भेजा जाता है।

मॉडरेटर करते हैं प्रश्नों की जांच

मॉडरेटर अलग-अलग प्रश्नपत्र सेट के लिए सवालों का चयन करते हैं। इस दौरान यह भी देखा जाता है कि प्रश्नों के जरिए पूरा पाठ्यक्रम कवर हो रहा है या नहीं। साथ ही प्रत्येक प्रश्न के उत्तर की शुद्धता की भी जांच की जाती है।

पूरी प्रक्रिया को इस तरह रखा जाता है कि किसी एक व्यक्ति को पूरे प्रश्नपत्र की जानकारी न हो। अलग-अलग चरणों में अलग विशेषज्ञों को जिम्मेदारी दी जाती है।

प्रश्नपत्र का होता है पुनरीक्षण

प्रश्नों के चयन के बाद प्रश्नपत्र को हल करके देखा जाता है। इसके दौरान मिले उत्तरों का मॉडरेटर के पास मौजूद उत्तरों से मिलान किया जाता है। अगर दोनों में अंतर मिलता है तो उसे दूर करने के लिए मॉडरेटर और पुनरीक्षकों के बीच चर्चा की जाती है।

सरकार के मुताबिक, प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में विशेषज्ञों को बदला जाता है। किसी एक व्यक्ति को दो अलग चरणों में शामिल नहीं किया जाता।

अलग-अलग भाषाओं में होता है अनुवाद

इसके बाद प्रश्नपत्र का संबंधित भाषा में अनुवाद किया जाता है। अनुवाद की शुद्धता जांचने के लिए उसे दूसरी भाषा में अनुवाद करने के बाद वापस अंग्रेजी में भी अनुवाद करके मिलान किया जाता है।

एनटीए 13 भाषाओं में परीक्षा आयोजित करता है। अनुवाद के लिए अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों का भी इस्तेमाल होने लगा है। हालांकि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता से अनुवाद के बाद उसकी दोबारा जांच की जाती है।

जिस स्थान पर प्रश्नपत्र का अनुवाद किया जाता है, वहां इंटरनेट की सुविधा नहीं होती और किसी को निजी डिजिटल उपकरण लेकर जाने की अनुमति भी नहीं होती।

पेपर सेट तैयार करने के लिए अलग-अलग पैनल

प्रश्नपत्र तैयार करने के लिए वरिष्ठ शिक्षकों के अलग-अलग पैनल बनाए जाते हैं। इन पैनल में शामिल विशेषज्ञों के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरण जमा करा लिए जाते हैं। हालांकि, उन्हें जरूरी संदर्भ सामग्री उपलब्ध रहती है।

हर पैनल में एक संयोजक और चार विशेषज्ञ होते हैं। सभी पैनल अलग-अलग काम करते हैं और एक पैनल के विशेषज्ञों को दूसरे पैनल में तैयार किए जा रहे प्रश्नों की जानकारी नहीं होती। इसके बाद प्रश्नों का चयन यादृच्छिक तरीके से किया जाता है।

अंतिम चरण तक प्रश्नपत्र के बारे में पूरी जानकारी किसी एक व्यक्ति के पास नहीं होती।

प्रिंटिंग और पैकिंग के बाद सील होता है पेपर

प्रश्नपत्र तैयार होने के बाद उसे प्रिंटिंग और पैकिंग के लिए भेजा जाता है। जानकारों के मुताबिक, कई बार प्रश्नपत्र में टाइपिंग से जुड़ी गलतियां रह जाती हैं। इनकी जिम्मेदारी प्रूफरीडिंग करने वाले कर्मचारियों की होती है, जो संविदा पर काम करते हैं।

पूरी प्रक्रिया के दौरान अगर एनटीए को किसी तरह की गड़बड़ी का पता चलता है तो बाद के चरण में भी प्रश्नपत्र के सेट बदले जा सकते हैं। प्रश्नपत्र के अंतिम सेट का फैसला परीक्षा वाले दिन सुबह किया जाता है। इसके बाद प्रश्नपत्रों को सील कर दिया जाता है।

 

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