भारत की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देगा मिडिल क्लास! 2036 तक 93% उपभोक्ता खर्च इसी वर्ग से होगा, निर्मला सीतारमण का बड़ा दावा
नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि आने वाले वर्षों में भारत का मिडिल क्लास देश की आर्थिक वृद्धि का सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन बनने जा रहा है। उनके अनुसार, वर्ष 2036 तक भारत के मिडिल क्लास और उच्च-मध्यम वर्ग की हिस्सेदारी देश के कुल उपभोक्ता खर्च में 93 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। इसका मतलब है कि अगले एक दशक में भारतीय अर्थव्यवस्था को सबसे अधिक मजबूती इसी वर्ग की बढ़ती खरीदारी और उपभोग से मिलेगी।
फ्रांस में आर्थिक सम्मेलन को किया संबोधित
फ्रांस के ऐक्स-मार्सेई विश्वविद्यालय में आयोजित प्रतिष्ठित आर्थिक सम्मेलन में वित्त मंत्री ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बाद भी भारत दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है। उन्होंने इसकी सबसे बड़ी वजह मजबूत घरेलू उपभोग को बताया। उनके मुताबिक, जब लोगों की खरीदारी बढ़ती है तो उद्योगों का उत्पादन बढ़ता है, नए रोजगार पैदा होते हैं और पूरी अर्थव्यवस्था को गति मिलती है।
2035 तक चीन को पीछे छोड़ सकता है भारत
निर्मला सीतारमण ने कहा कि वर्तमान में भारत की करीब 31 प्रतिशत आबादी मिडिल क्लास में शामिल है। उन्होंने आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) के अनुमान का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2030 से 2035 के बीच मिडिल क्लास आबादी के मामले में भारत चीन को भी पीछे छोड़ सकता है। उन्होंने बताया कि 1995 से 2021 के बीच भारत का मिडिल क्लास औसतन 6.3 प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ा है और आने वाले वर्षों में इसके और तेजी से विस्तार की उम्मीद है।
सरकारी योजनाओं से करोड़ों लोग गरीबी से बाहर आए
वित्त मंत्री ने कहा कि वित्तीय समावेशन, जनकल्याणकारी योजनाओं और आर्थिक सुधारों के कारण करोड़ों लोग गरीबी से निकलकर मिडिल क्लास तक पहुंचे हैं। उनके मुताबिक, अब तक 24.8 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल बैंकिंग, डिजिटल भुगतान व्यवस्था और आसान ऋण प्रणाली ने लोगों की आर्थिक क्षमता को मजबूत किया है। वहीं, कई वस्तुओं पर जीएसटी दरों में कमी से भी घरेलू खर्च बढ़ाने में मदद मिली है।
टियर-2 और टियर-3 शहर बनेंगे नए आर्थिक केंद्र
निर्मला सीतारमण ने कहा कि अब आर्थिक विकास केवल दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे महानगरों तक सीमित नहीं है। टियर-2 और टियर-3 शहर भी तेजी से नए आर्थिक केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के अनुमान के अनुसार, आने वाले वर्षों में 500 से अधिक भारतीय शहर नए आर्थिक हब बन सकते हैं, जिससे रोजगार, निवेश और उपभोग के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
AI और MSME से मिलेगी नई ताकत
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत का युवा वर्ग तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक को अपना रहा है और उद्योगों को एआई आधारित समाधान उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने बताया कि देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र का लगभग 40 प्रतिशत उत्पादन निर्यात होता है और इनमें से कई कंपनियां अब एआई आधारित बिजनेस मॉडल अपना रही हैं। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होने के साथ तकनीकी विकास को भी बढ़ावा मिल रहा है।
भारत बन रहा AI और डेटा सेंटर का बड़ा केंद्र
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया के प्रमुख एआई ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स और डेटा सेंटर्स वाले देशों में तेजी से अपनी जगह बना रहा है। इसके पीछे देश की बड़ी और कुशल तकनीकी कार्यबल सबसे बड़ी ताकत है, जो वैश्विक कंपनियों की जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभा रही है।
2036 तक मिडिल क्लास बनेगा सबसे बड़ा आर्थिक आधार
वित्त मंत्री के मुताबिक, यदि मौजूदा रफ्तार बनी रही तो 2036 तक देश के कुल उपभोक्ता खर्च का लगभग 93 प्रतिशत हिस्सा मिडिल क्लास और उच्च-मध्यम वर्ग से आएगा। उनका मानना है कि यही वर्ग आने वाले वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगा।





