E20 पेट्रोल पर सरकार ने तोड़ी चुप्पी, इंजन खराब होने से लेकर माइलेज तक 10 बड़े दावों का दिया जवाब

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नई दिल्ली: पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल (E20) मिश्रण को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं और विवादों के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा है कि E20 कार्यक्रम को लेकर फैलाए जा रहे अधिकांश दावे भ्रामक हैं और इनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। मंत्रालय के मुताबिक, एथेनॉल मिश्रित ईंधन को लेकर किए गए अध्ययन और कई देशों के अनुभव इसके सुरक्षित उपयोग की पुष्टि करते हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल दावों को बताया भ्रामक

मंत्रालय ने कहा कि सोशल मीडिया पर E20 को लेकर इंजन खराब होने, माइलेज कम होने, अत्यधिक पानी की खपत, बीमा और वारंटी पर असर जैसे कई दावे किए जा रहे हैं। सरकार ने इन सभी दावों को तथ्यों के आधार पर गलत बताया है।

सरकार ने 10 बिंदुओं में दिया जवाब

सरकार की ओर से जारी स्पष्टीकरण में E20 को लेकर उठाए गए सवालों का विस्तार से जवाब दिया गया है।

पहले दावे के अनुसार, एक लीटर एथेनॉल बनाने में 10 हजार लीटर पानी खर्च होने की बात कही जा रही थी। मंत्रालय ने इसे गलत बताते हुए कहा कि एक लीटर एथेनॉल के उत्पादन में केवल 3 से 5 लीटर प्रोसेस्ड पानी का उपयोग होता है। कई उत्पादन इकाइयां जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) तकनीक अपनाकर पानी का दोबारा इस्तेमाल भी करती हैं।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि E20 कोई नया प्रयोग नहीं है। अमेरिका, ब्राजील, कनाडा, जापान, थाईलैंड और कई यूरोपीय देशों में वर्षों से एथेनॉल मिश्रित ईंधन का इस्तेमाल किया जा रहा है।

इंजन और माइलेज पर क्या कहा?

इंजन खराब होने के दावों पर मंत्रालय ने कहा कि ARAI और अन्य संस्थानों के अध्ययन में E20 से इंजन पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पाया गया है। हालांकि, कुछ पुराने वाहनों में रबर से बने कुछ पुर्जों को बदलने की जरूरत पड़ सकती है।

माइलेज को लेकर सरकार का कहना है कि परीक्षणों में केवल मामूली अंतर देखने को मिला है और इससे वाहन के समग्र प्रदर्शन पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ता।

वारंटी, बीमा और वायरल वीडियो पर भी सफाई

मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि E20 के लिए डिजाइन या अनुमोदित वाहनों की वारंटी और बीमा पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

सरकार ने यह भी कहा कि फ्यूल ग्रेड एथेनॉल में चीनी नहीं होती। इसमें विशेष डिनैचुरेंट मिलाए जाते हैं, जिससे इसकी गंध पेट्रोल जैसी रहती है। ऐसे में कीड़े आकर्षित होने का दावा भी पूरी तरह गलत है।

मंत्रालय के अनुसार, अदालत में E20 की वैधता नहीं बल्कि एथेनॉल खरीद से जुड़े अनुबंधों पर सुनवाई चल रही थी। इसके अलावा आधुनिक वाहनों और पेट्रोल पंपों में पानी की मिलावट से बचाव के पर्याप्त इंतजाम मौजूद हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल उस वीडियो को भी फर्जी बताया गया है, जिसमें पेट्रोल में गन्ने का रस मिलाने जैसा दावा किया गया था। सरकार ने कहा कि फ्यूल ग्रेड एथेनॉल निर्धारित औद्योगिक प्रक्रिया और गुणवत्ता मानकों के तहत तैयार किया जाता है और उसी के अनुसार पेट्रोल में मिश्रित किया जाता है।

सरकार ने गिनाए E20 के फायदे

मंत्रालय के अनुसार, एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से अब तक 1.9 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। इसके अलावा किसानों को 1.6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की आय प्राप्त हुई है। सरकार का दावा है कि इससे कच्चे तेल के आयात में 310 लाख मीट्रिक टन तक की कमी आई है और प्रदूषण के स्तर में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।

 

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