GST नोटिस से घिरी पतंजलि फूड्स, ₹1,353 करोड़ की डिमांड के बाद शेयरों में गिरावट; निवेशकों की बढ़ी चिंता

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नई दिल्ली: योग गुरु बाबा रामदेव से जुड़ी कंपनी पतंजलि फूड्स एक बार फिर चर्चा में आ गई है। इस बार कंपनी को चेन्नई टैक्स विभाग की ओर से मिले ₹1,353 करोड़ के बड़े जीएसटी डिमांड नोटिस ने बाजार और निवेशकों का ध्यान खींच लिया है। नोटिस की खबर सामने आते ही कंपनी के शेयरों में दबाव देखने को मिला और कारोबार के अंत में स्टॉक करीब 2.5 फीसदी गिरकर ₹454 पर बंद हुआ।

रिपोर्ट्स के मुताबिक यह नोटिस वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान कथित टर्नओवर मिसमैच और टीडीएस कटौती में अंतर को लेकर जारी किया गया है। टैक्स विभाग का आरोप है कि कंपनी द्वारा घोषित बिक्री के आंकड़ों और टैक्स रिकॉर्ड में अंतर पाया गया है।

CGST और SGST मिलाकर हजारों करोड़ की मांग

जानकारी के अनुसार नोटिस में ₹676.46 करोड़ केंद्रीय जीएसटी और ₹676.46 करोड़ राज्य जीएसटी की मांग की गई है। इसके अलावा ₹135.29 करोड़ का जुर्माना और 18 प्रतिशत ब्याज भी जोड़ा गया है। इस तरह कुल मामला ₹1,352.9 करोड़ तक पहुंच गया है।

इतनी बड़ी टैक्स डिमांड सामने आने के बाद बाजार में कंपनी को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

कंपनी ने कहा- मजबूत तरीके से रखेंगे पक्ष

पतंजलि फूड्स ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह अपने टैक्स सलाहकारों के साथ मिलकर नोटिस का जवाब तैयार कर रही है। कंपनी का कहना है कि उसके पास अपने पक्ष को मजबूती से रखने के पर्याप्त आधार मौजूद हैं और फिलहाल किसी बड़े वित्तीय नुकसान की आशंका नहीं है।

कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

बाजार विशेषज्ञों की नजर अगले कदम पर

बाजार जानकारों का कहना है कि इतनी बड़ी टैक्स डिमांड किसी भी कंपनी के लिए चिंता का विषय बन सकती है, क्योंकि इसका असर निवेशकों के भरोसे पर पड़ता है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि कई मामलों में शुरुआती टैक्स डिमांड बाद में कम हो जाती है या कंपनियों को कानूनी प्रक्रिया के जरिए राहत मिल जाती है।

ऐसे में आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि कंपनी इस मामले को किस तरह संभालती है।

मुनाफे पर दबाव, लेकिन कारोबार में बढ़ोतरी

अगर कंपनी के हालिया वित्तीय प्रदर्शन की बात करें तो पतंजलि फूड्स ने तीसरी तिमाही में ₹364.2 करोड़ का शुद्ध लाभ दर्ज किया था। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 26 प्रतिशत कम रहा।

हालांकि कंपनी की आय में बढ़ोतरी देखने को मिली और राजस्व 16.5 प्रतिशत बढ़कर ₹10,483 करोड़ तक पहुंच गया। इससे संकेत मिलता है कि कारोबार में विस्तार जारी है, लेकिन मुनाफे पर दबाव बना हुआ है।

शेयर बाजार में दिखा असर

जीएसटी विभाग के नोटिस की खबर सामने आने के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिसका सीधा असर शेयर कीमत पर दिखाई दिया। बुधवार को कंपनी का शेयर 2.52 प्रतिशत गिरावट के साथ ₹454 पर बंद हुआ।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कंपनी टैक्स अधिकारियों को संतुष्ट करने में सफल रहती है तो शेयर में दोबारा तेजी लौट सकती है। वहीं मामला लंबा खिंचने पर बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।

टैक्स अनुपालन पर फिर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि बड़े कॉरपोरेट समूहों के लिए टैक्स अनुपालन कितना अहम हो चुका है। छोटी सी विसंगति भी हजारों करोड़ रुपये के नोटिस का रूप ले सकती है, जिसका असर सीधे कंपनी की साख और शेयर बाजार प्रदर्शन पर पड़ता है।