UK में भारतीय मूल के न्यूरोसर्जन पर बड़ी कार्रवाई, मरीज से निजी संबंध और दवाएं लिखने के आरोप में 8 महीने का निलंबन

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लंदन: यूनाइटेड किंगडम में भारतीय मूल के न्यूरोसर्जन चिराग पटेल पर पेशेवर आचार संहिता के उल्लंघन के आरोप में बड़ी कार्रवाई की गई है। एक महिला मरीज के साथ निजी संबंध रखने और बिना उचित मेडिकल रिकॉर्ड के दर्द निवारक दवाएं लिखने के मामले में उन्हें आठ महीने के लिए मेडिकल प्रैक्टिस से निलंबित कर दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक चिराग पटेल कार्डिफ स्थित यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल ऑफ वेल्स में न्यूरोसर्जन के तौर पर कार्यरत थे। मामला उस महिला मरीज से जुड़ा है, जो कमर दर्द के इलाज के लिए उनके संपर्क में आई थी।

इलाज के दौरान बने निजी संबंध

रिपोर्ट के अनुसार महिला का इलाज वर्ष 2019 में शुरू हुआ था। डॉक्टर ने उसके कई ऑपरेशन किए। दूसरे ऑपरेशन के बाद दोनों के बीच निजी संबंध बनने की बात सामने आई। बताया जा रहा है कि यह संबंध करीब छह महीने तक चला।

आरोप है कि इसी दौरान डॉक्टर ने महिला को बिना किसी आधिकारिक मेडिकल रिकॉर्ड में दर्ज किए दर्द निवारक दवाएं लिखीं। विशेषज्ञों के मुताबिक इस तरह की दवाओं का लंबे समय तक सेवन लत की वजह बन सकता है।

जांच में माना गया गंभीर पेशेवर उल्लंघन

मामले की जांच यूनाइटेड किंगडम की मेडिकल अनुशासन प्रक्रिया के तहत की गई। जांच में यह पाया गया कि डॉक्टर और मरीज के बीच बने संबंध पेशेवर नैतिकता और चिकित्सा आचार संहिता के खिलाफ थे।

इसके बाद संबंधित प्राधिकरण ने चिराग पटेल को आठ महीने तक किसी भी प्रकार की चिकित्सा प्रैक्टिस करने से प्रतिबंधित कर दिया।

सुनवाई में डॉक्टर ने जताया पछतावा

सुनवाई के दौरान डॉक्टर पटेल ने अपने व्यवहार पर पछतावा व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दूसरे ऑपरेशन के बाद उन्हें लगा था कि मरीज के इलाज में उनकी पेशेवर भूमिका समाप्त हो चुकी है, जिसके बाद दोनों के बीच निजी संबंध शुरू हुए।

उन्होंने यह भी दावा किया कि बाद में महिला ने उन पर दबाव बनाया, जिसके कारण वह दवाइयां लिखते रहे। हालांकि जांच समिति ने इस पूरे मामले को गंभीर पेशेवर उल्लंघन माना।

तीसरे ऑपरेशन के बाद बढ़ा विवाद

रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ समय बाद महिला को दोबारा स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हुईं और उसका तीसरा ऑपरेशन किया गया। इसी दौरान दोनों के संबंध खराब हो गए, जिसके बाद महिला ने डॉक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

मामला अदालत और मेडिकल नियामक संस्थाओं तक पहुंचा, जहां विस्तृत जांच के बाद कार्रवाई की गई।

मेडिकल एथिक्स को लेकर फिर शुरू हुई बहस

इस मामले के सामने आने के बाद ब्रिटेन में डॉक्टर और मरीज के बीच पेशेवर सीमाओं तथा मेडिकल नैतिकता को लेकर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि चिकित्सा पेशे में विश्वास, पारदर्शिता और पेशेवर व्यवहार सबसे अहम होते हैं, इसलिए इस तरह के मामलों को बेहद गंभीरता से देखा जाता है।

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