यूपी में ग्राम प्रधान बने प्रशासक, पंचायतों की कमान संभालने का नया आदेश लागू

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों के संचालन को लेकर बड़ा प्रशासनिक बदलाव लागू कर दिया गया है। अब ग्राम प्रधानों को ही ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त किया गया है। इस निर्णय के बाद जिलों और ब्लॉक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित कर सरकार के प्रति आभार जताने की तैयारी की जा रही है। वहीं, दूसरी ओर राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन ने ओबीसी आरक्षण को नई जनगणना के आंकड़ों के आधार पर तय करने की मांग उठाई है।

नई जनगणना के आधार पर आरक्षण तय करने की मांग
राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन का कहना है कि वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर ओबीसी आरक्षण तय करना अब उचित नहीं है। संगठन के अनुसार पिछले 15 वर्षों में ग्रामीण आबादी में बदलाव हुआ है, ऐसे में पंचायत चुनावों के लिए आरक्षण नई जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही निर्धारित किया जाना चाहिए। संगठन ने संकेत दिया है कि वह इस संबंध में समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग और राज्य सरकार को मांग पत्र सौंपेगा।

ग्राम प्रधानों ने संभाली प्रशासक की जिम्मेदारी
लखनऊ में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अखिलेश सिंह और प्रदेश अध्यक्ष ललित शर्मा ने इस निर्णय को ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि पहली बार ग्राम प्रधानों को प्रशासक की जिम्मेदारी दी गई है, जिसे लेकर लंबे समय से प्रयास किए जा रहे थे। संगठन का दावा है कि इस फैसले को लागू कराने में ग्राम प्रधानों की सक्रिय भूमिका रही है। साथ ही यह भी बताया गया कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड में पहले से इस तरह की व्यवस्था लागू है।

57694 पंचायतों में प्रधानों ने संभाला कार्यभार
राज्य में अब 57694 निवर्तमान ग्राम प्रधानों ने प्रशासक के रूप में पंचायतों की जिम्मेदारी संभाल ली है। इसके साथ ही 7.32 लाख ग्राम पंचायत सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो गया है और पंचायत समितियां भंग कर दी गई हैं। नई व्यवस्था के तहत निवर्तमान ग्राम प्रधान और सचिव मिलकर पंचायतों का संचालन करेंगे।

नीतिगत फैसलों पर लगी पाबंदी
सरकारी निर्देशों के अनुसार प्रशासक केवल रूटीन कार्य ही कर सकेंगे, जबकि नीतिगत निर्णय लेने का अधिकार सीमित रहेगा। किसी भी नीतिगत प्रस्ताव को जिला पंचायती राज अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी के पास भेजा जाएगा और उनकी स्वीकृति के बाद ही उसे मंजूरी मिलेगी। इस व्यवस्था के बाद पंचायत स्तर की छह समितियां स्वतः समाप्त हो गई हैं।

आगामी रणनीति और संगठन का विस्तार
संगठन ने कहा है कि इस फैसले के बाद प्रदेश, जिला और ब्लॉक स्तर पर आभार कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही संगठन का विस्तार अन्य राज्यों में भी किया जाएगा और देशभर के लगभग ढाई लाख ग्राम प्रधानों के लिए एक समान वेलफेयर पॉलिसी तैयार कराने की योजना है।