हमास हमले के 1000 दिन बाद इजराइल पर युद्ध का गहरा असर, 26 हजार से ज्यादा सैनिक घायल; मानसिक स्वास्थ्य संकट ने बढ़ाई चिंता
तेल अवीव: 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास हमले के लगभग 1000 दिन बाद इजराइल एक नए संकट का सामना कर रहा है। युद्ध के मैदान से लौटे हजारों सैनिक शारीरिक और मानसिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। इजराइल के रक्षा मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि घायल सैनिकों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण पुनर्वास व्यवस्था पर अभूतपूर्व दबाव बन गया है और यदि समय रहते व्यापक कदम नहीं उठाए गए तो पूरा तंत्र प्रभावित हो सकता है।
रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, हमास हमले के बाद से अब तक 26,200 से अधिक इजराइली रक्षा बल (IDF) के सैनिक और सुरक्षा कर्मी घायल हो चुके हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे जवानों की है जो मानसिक स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं से गुजर रहे हैं।
65 प्रतिशत सैनिक मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से प्रभावित
मंत्रालय के मुताबिक घायल सैनिकों में करीब 65 प्रतिशत लोग पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD), चिंता, अवसाद और सामान्य नागरिक जीवन में वापस लौटने से जुड़ी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। अनुमान है कि आने वाले वर्षों में यह चुनौती और गंभीर रूप ले सकती है।
आंकड़ों के अनुसार 2026 तक घायल सैनिकों और सुरक्षा कर्मियों की संख्या 90 हजार से अधिक पहुंच सकती है, जबकि 2028 तक यह आंकड़ा लगभग एक लाख के करीब पहुंचने की संभावना जताई गई है। इनमें से लगभग आधे लोगों को मनोवैज्ञानिक सहायता की आवश्यकता पड़ सकती है।
17 हजार से अधिक लोग मानसिक आघात से जूझ रहे
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि 7 अक्टूबर 2023 के बाद घायल हुए लोगों में करीब 17 हजार व्यक्ति मानसिक आघात से प्रभावित हैं। इनमें लगभग 7,700 ऐसे हैं जिन्हें मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की चोटें लगी हैं। वहीं करीब 9,000 लोगों का उपचार मुख्य रूप से शारीरिक चोटों के लिए किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक चले युद्ध और लगातार तनावपूर्ण परिस्थितियों ने सैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाला है।
रक्षा मंत्रालय ने जताई व्यवस्था पर दबाव की आशंका
रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक अमीर बाराम ने कहा है कि पुनर्वास व्यवस्था को मजबूत करने के लिए विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों को लागू करना बेहद जरूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आवश्यक सुधार नहीं किए गए तो युद्ध में घायल सैनिकों के पुनर्वास का पूरा तंत्र दबाव के कारण प्रभावित हो सकता है।
समिति ने पुनर्वास विभाग का बजट बढ़ाने, प्रत्येक घायल पूर्व सैनिक के लिए व्यक्तिगत केस मैनेजर नियुक्त करने और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की सिफारिश की है।
मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ाया गया
युद्ध के दौरान बढ़ती जरूरतों को देखते हुए पुनर्वास विभाग ने अपनी सेवाओं का विस्तार किया है। मंत्रालय के अनुसार मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की संख्या चार गुना बढ़ाकर करीब 4,000 कर दी गई है। इसके अलावा पुनर्वास केंद्रों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है।
देशभर में नौ पुनर्वास फार्म, एक मोबाइल मानसिक स्वास्थ्य संकट इकाई और युवा मरीजों के लिए विशेष नर्सिंग विभाग स्थापित किए गए हैं। इसके बावजूद मंत्रालय का मानना है कि मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर और व्यापक प्रयासों की आवश्यकता है।
युवा सैनिक सबसे अधिक प्रभावित
मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार पुनर्वास प्रणाली में शामिल मरीजों में 92 प्रतिशत पुरुष और 8 प्रतिशत महिलाएं हैं। नए मामलों में लगभग आधे मरीज 30 वर्ष से कम आयु के हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि युद्ध का असर बड़ी संख्या में युवा सैनिकों पर पड़ा है।
युद्ध की मानवीय कीमत पर बढ़ी बहस
लगातार बढ़ती मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य चुनौतियों ने इजराइल में युद्ध की मानवीय कीमत को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि सैनिकों की पुनर्वास जरूरतों को पूरा करने के लिए दीर्घकालिक और मजबूत नीतिगत हस्तक्षेप आवश्यक होंगे।





