पुरी रथयात्रा 2026: जगन्नाथ रथों को मिला दिव्य आकार, तेज हुई तैयारियां… मूर्तिकारों की बेमिसाल कारीगरी बनी आकर्षण का केंद्र

22A_119

पुरी: भगवान जगन्नाथ की विश्वविख्यात रथयात्रा 2026 को लेकर तैयारियां अब निर्णायक दौर में पहुंच गई हैं। ओडिशा के पुरी में तीनों भव्य रथों के निर्माण कार्य ने रफ्तार पकड़ ली है। पारंपरिक सेवक और शिल्पकार पूरी निष्ठा के साथ दिन-रात जुटे हुए हैं, ताकि रथयात्रा से पहले रथों को भव्य और दिव्य स्वरूप दिया जा सके।

रथ निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ा

रथ निर्माण में तकनीकी मजबूती के साथ-साथ कलात्मक सौंदर्य पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुख्य महाराणा की निगरानी में साथी महाराणा और भोई सेवकों के सहयोग से निर्माण कार्य लगातार जारी है। तीनों रथों के लिए निर्धारित 12 द्वार बेढ़ों में से प्रत्येक रथ के दो-दो द्वार बेढ़ों का निर्माण पूरा कर लिया गया है।

वहीं, रथों की वेदी के चारों ओर बनाई जा रही लकड़ी की घेराबंदी ‘पटाबाड़िया’ का कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है। 13 परस्त पोटल स्थापित किए जा चुके हैं और शेष चार कोनों पर निर्माण कार्य जल्द पूरा होने की संभावना है।

नाटगोड़ों पर उभर रही अद्भुत नक्काशी

रूपकार सेवकों की कलात्मक मेहनत रथों की भव्यता को नया आयाम दे रही है। तीनों रथों के कुल 24 नाटगोड़ों में से 12 पर कंदर्प स्वरूप की नक्काशी पूरी कर ली गई है। बाकी 12 नाटगोड़ों पर भी तेजी से काम चल रहा है।

इसके साथ ही तैयार हो चुकी प्रतिमाओं को पॉलिश करने और अलंकरण से सजाने का कार्य भी लगातार जारी है, जिससे रथों की सुंदरता और आकर्षण बढ़ रहा है।

कलश और पंखुड़ियों का निर्माण पूरा

रथों की शोभा बढ़ाने वाले बड़े कलश पेंडी और 32 पंखुड़ियों के निर्माण का कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। ये कलात्मक संरचनाएं रथों की भव्यता में विशेष योगदान दे रही हैं और अंतिम रूप दिए जाने की प्रक्रिया जारी है।

मजबूती के लिए लगाए जा रहे लोहे के उपकरण

रथों की सुरक्षा और मजबूती सुनिश्चित करने के लिए भी व्यापक कार्य किया जा रहा है। दोलवेदी स्थित अस्थायी कमारशाला में ओझा कमार सेवक विभिन्न लोहे के उपकरण तैयार कर रहे हैं। इनमें एल-क्लैम्प, यू-क्लैम्प और कलश कांटे शामिल हैं, जिनका उपयोग रथों के विभिन्न जोड़ स्थानों पर किया जाएगा।

इसके अलावा, पहियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए महाराणा सेवकों द्वारा धुरी के जोड़ स्थानों पर नट-बोल्ट की सहायता से लोहे की प्लेटें फिट की जा रही हैं, ताकि रथ यात्रा के दौरान संरचना पूरी तरह सुरक्षित बनी रहे।

रंगों से सज रहे रथों के बाहरी हिस्से

चित्रकार सेवकों की सक्रिय भागीदारी से रथों का स्वरूप और अधिक आकर्षक बनता जा रहा है। पोटल पाराभाड़ी पर रंगाई का कार्य पूरा होने के बाद अब पार्श्व देव-देवियों की प्रतिमाओं, शिखर डमरू, आंवला, उलट शुआ और नाटगोड़ों पर रंगों का लेप चढ़ाया जा रहा है।

रथों की बाहरी सजावट तेजी से आगे बढ़ रही है और धीरे-धीरे तीनों रथ अपने पारंपरिक दिव्य स्वरूप में दिखाई देने लगे हैं। विभिन्न सेवकों और शिल्पकारों की सामूहिक मेहनत से यह स्पष्ट हो गया है कि रथयात्रा की तैयारियां पूर्णता की ओर बढ़ रही हैं। इसके चलते श्रद्धालुओं और भक्तों के बीच उत्साह लगातार बढ़ता जा रहा है।

 

----------------------------------------------------------------------------------------------