राम मंदिर चढ़ावा विवाद में बड़ा मोड़! SIT ने सौंपी 150 पेज की रिपोर्ट, कई नामों पर बढ़ सकती है कार्रवाई
लखनऊ: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि के कथित गड़बड़ी मामले में जांच ने अहम मोड़ ले लिया है। इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट मिलने के बाद अब पूरे मामले में बड़े खुलासों और संभावित कार्रवाई की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय एसआईटी ने सोमवार को अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी। यह रिपोर्ट प्रदेश के अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को दी गई है, जिसमें अब तक की जांच, पूछताछ और दस्तावेजों की पड़ताल से जुड़े निष्कर्ष शामिल हैं।
गोपनीय रखी गई रिपोर्ट, जांच अभी जारी
लखनऊ मंडल के आयुक्त और एसआईटी अध्यक्ष विजय विश्वास पंत ने अपनी टीम के अन्य सदस्यों के साथ रिपोर्ट सौंपने के बाद कहा कि यह प्रारंभिक रिपोर्ट है और इसकी जानकारी गोपनीय रखी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है और फिलहाल रिपोर्ट की सामग्री सार्वजनिक नहीं की जा सकती।
राज्य सरकार की ओर से भी साफ किया गया है कि जांच प्रक्रिया अभी जारी है और यह अंतिम रिपोर्ट नहीं मानी जाएगी।
150 लोगों से पूछताछ, 150 पेज में दर्ज हुई पूरी पड़ताल
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी की रिपोर्ट करीब 150 पृष्ठों की है। इसमें लगभग 150 लोगों से हुई पूछताछ, दस्तावेजों की जांच और विभिन्न स्तरों पर जुटाए गए तथ्यों का विस्तृत विवरण शामिल किया गया है।
बताया जा रहा है कि जांच टीम ने मामले में एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश भी की है। इसके अलावा मंदिर ट्रस्ट के ढांचे में बदलाव और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने संबंधी सुझाव भी रिपोर्ट में शामिल हैं।
मंदिर प्रशासन में बदलाव की सिफारिश
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद पर एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी की नियुक्ति का सुझाव दिया है। साथ ही विस्तृत जांच पूरी करने के लिए टीम को अतिरिक्त समय देने की भी सिफारिश की गई है।
रिपोर्ट में पिछले पांच वर्षों के दौरान मंदिर को प्राप्त दान और चढ़ावे का व्यापक ऑडिट कराने का प्रस्ताव भी रखा गया है, ताकि वित्तीय लेनदेन की पूरी तस्वीर सामने आ सके।
भविष्य में गड़बड़ियां रोकने के लिए सुझाए गए उपाय
जांच रिपोर्ट में भविष्य में किसी भी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता को रोकने के लिए कई सुधारात्मक कदम सुझाए गए हैं। इनमें नए कर्मचारियों की नियुक्ति, निगरानी तंत्र को मजबूत करना और प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाना प्रमुख रूप से शामिल हैं।
मुख्यमंत्री लेंगे अंतिम फैसला
अब एसआईटी की सिफारिशों और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई को लेकर अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्तर पर लिया जाएगा। प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आने के बाद इस संवेदनशील मामले पर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों की नजरें टिक गई हैं।





