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लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र के पुरनिया इलाके में हुए भीषण अग्निकांड ने 15 परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 15 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें तीन महिलाएं शामिल हैं। मृतकों की उम्र 20 से 24 वर्ष के बीच बताई जा रही है। घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल है, वहीं लखनऊ विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

FIR दर्ज, कई आरोपी गिरफ्तार
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने छह नामजद आरोपियों सहित अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस अब तक रामकृष्ण उपाध्याय, वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला और तुशांक कृष्णा जायसवाल को गिरफ्तार कर चुकी है। अधिकारियों के अनुसार अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच जारी है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

हादसे के बाद सामने आई दर्दनाक कहानियां
घटना के बाद एक के बाद एक दर्दनाक कहानियां सामने आ रही हैं। किसी ने अंतिम समय में अपने परिवार से फोन पर बात की, तो कोई जान बचाने की कोशिश में ही हादसे का शिकार हो गया। पूरे इलाके में इस भयावह मंजर की दहशत अभी भी बनी हुई है।

‘फोन करते रहे, कोई जवाब नहीं मिला’ – बची युवती का बयान
हादसे में बमुश्किल बची और अस्पताल में भर्ती एक युवती ने उस रात का खौफनाक अनुभव साझा किया। उसने बताया कि वह बिल्डिंग में काम करती थी और आग लगते ही अफरातफरी मच गई। बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा था। उसने बताया कि सभी लोग घबराकर लगातार फोन करते रहे, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। स्थिति बिगड़ने पर उसने खिड़की तोड़कर पाइप के सहारे नीचे उतरकर अपनी जान बचाई।

बिल्डिंग के अवैध उपयोग पर उठे सवाल
जांच में यह सामने आया है कि जिस इमारत में आग लगी, उसे मूल रूप से आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृति दी गई थी, लेकिन बाद में इसका इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जाने लगा। आरोप है कि लखनऊ विकास प्राधिकरण की निगरानी के बावजूद भवन में नियमों के विपरीत व्यावसायिक संचालन चलता रहा और समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की गई।

 

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