अब सिर्फ 112 पर मिलेगी हर इमरजेंसी मदद, सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को दिया बड़ा निर्देश
नई दिल्ली: देश में आपातकालीन सेवाओं को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब पुलिस, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस और महिला हेल्पलाइन जैसे अलग-अलग नंबरों की जगह केवल एकीकृत हेल्पलाइन नंबर ‘112’ का इस्तेमाल किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि अगले तीन महीने के भीतर सभी इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबरों को तकनीकी और संचालन स्तर पर ‘112’ से जोड़ दिया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सड़क हादसों और अन्य आपात स्थितियों में समय पर सहायता उपलब्ध कराना नागरिकों के जीवन के अधिकार से जुड़ा मुद्दा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत समय पर ट्रॉमा केयर और आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना राज्य की जिम्मेदारी है।
यह आदेश जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चंदूरकर की पीठ ने जारी किया। अदालत ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में अलग-अलग सेवाओं के लिए कई हेल्पलाइन नंबर होने से आम लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा होती है। ऐसे में पूरे देश में एक समान और प्रभावी इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम लागू करना जरूरी हो गया है।
अब 100, 101, 108 समेत सभी नंबर होंगे 112 में शामिल
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार अब 100, 101, 102, 108, 1033 और 1091 जैसे सभी प्रमुख हेल्पलाइन नंबरों को ‘112’ में समाहित किया जाएगा। इसका मतलब यह होगा कि किसी भी तरह की आपात स्थिति में नागरिकों को सिर्फ एक नंबर डायल करना होगा और संबंधित विभाग तुरंत सहायता उपलब्ध कराएगा।
अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया है कि वे अगले तीन महीने में इस नई व्यवस्था को पूरी तरह लागू करें और उसके बाद अनुपालन रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करें।
112 हेल्पलाइन को लेकर चलेगा जागरूकता अभियान
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि ‘112’ हेल्पलाइन को लेकर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि देश के हर नागरिक तक इसकी जानकारी पहुंच सके। अदालत का मानना है कि एकीकृत हेल्पलाइन व्यवस्था तभी प्रभावी होगी, जब आम लोग इसके इस्तेमाल और सुविधाओं के बारे में पूरी तरह जागरूक हों।
गुड समैरिटन कानून पर भी सख्त निर्देश
सिर्फ हेल्पलाइन सिस्टम तक सीमित न रहते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को ‘गुड समैरिटन कानून’ के तहत प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र विकसित करने का भी निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य सड़क हादसों में घायल लोगों की मदद करने वाले नागरिकों को कानूनी सुरक्षा और प्रोत्साहन देना है, ताकि लोग बिना डर के जरूरतमंदों की सहायता कर सकें।
तीन महीने में बनेगा राष्ट्रीय मेडिकल रेस्क्यू प्रोटोकॉल
अदालत ने केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय और सड़क परिवहन मंत्रालय को भी निर्देश दिया है कि वे अगले तीन महीने के भीतर ट्रॉमा मामलों के लिए राष्ट्रीय स्तर का ‘मेडिकल रेस्क्यू प्रोटोकॉल’ तैयार करें। इसके लागू होने के बाद राज्यों को अगले तीन महीने में अपने यहां इसे प्रभावी रूप से लागू करना होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला देश में आपातकालीन सेवाओं को अधिक तेज, सरल और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है। एकीकृत हेल्पलाइन सिस्टम लागू होने से दुर्घटनाओं और संकट की स्थितियों में लोगों को समय पर मदद मिल सकेगी और कई लोगों की जान बचाई जा सकेगी।



