भारत-बांग्लादेश सीमा होगी और अभेद्य! सुंदरबन में पहली बार 90 किमी फेंसिंग की तैयारी, BSF का बड़ा मास्टर प्लान शुरू
नई दिल्ली: भारत-बांग्लादेश सीमा की सुरक्षा को और मजबूत बनाने की दिशा में सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने पश्चिम बंगाल के सुंदरबन क्षेत्र में पहली बार करीब 90 किलोमीटर लंबी फेंसिंग की तैयारी शुरू कर दी है। गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए व्यवहार्यता और तकनीकी अध्ययन शुरू कर दिया गया है। इसका उद्देश्य घुसपैठ, तस्करी और अन्य सीमा पार अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।
सुंदरबन में अब तक क्यों नहीं हो सकी थी फेंसिंग?
सुंदरबन भारत-बांग्लादेश सीमा का सबसे चुनौतीपूर्ण इलाका माना जाता है। यहां घने मैंग्रोव जंगल, ज्वारीय दलदल, नदी-नाले और तटीय तटबंध होने के कारण पारंपरिक सीमा बाड़बंदी संभव नहीं हो सकी थी। फिलहाल इस क्षेत्र में सीमा की निगरानी फ्लोटिंग बॉर्डर आउटपोस्ट और जल गश्ती के जरिए की जाती है, क्योंकि नदी मार्गों पर स्थायी फेंसिंग मौजूद नहीं है।
हाईटेक निगरानी से होगी चौबीसों घंटे सुरक्षा
नई परियोजना के तहत केवल फेंसिंग ही नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक आधारित निगरानी प्रणाली भी विकसित की जाएगी। सीमा क्षेत्र में अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे, हाई-पावर सर्चलाइट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक निगरानी उपकरण लगाए जाएंगे, ताकि दिन-रात सीमा पर प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही समुद्री गश्त को भी पहले से अधिक मजबूत बनाया जाएगा।
BSF महानिदेशक ने किया सीमा क्षेत्र का निरीक्षण
हाल ही में BSF के महानिदेशक ने सुंदरबन क्षेत्र का दौरा कर प्रस्तावित परियोजना और मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। अधिकारियों के साथ हुई बैठक में तय समयसीमा के भीतर फेंसिंग कार्य पूरा करने, नदी क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और आधुनिक तकनीक के बेहतर उपयोग पर विस्तार से चर्चा की गई।
पर्यावरण संरक्षण के साथ होगा निर्माण कार्य
सुंदरबन का बड़ा हिस्सा संरक्षित वन क्षेत्र और वन्यजीव अभयारण्य के अंतर्गत आता है। भारत-बांग्लादेश सीमा का लगभग 71 किलोमीटर हिस्सा इसी संरक्षित क्षेत्र से होकर गुजरता है। ऐसे में परियोजना के सभी कार्य पर्यावरणीय नियमों और आवश्यक अनुमतियों का पालन करते हुए किए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना प्राथमिकता होगी।
तस्करी और सीमा पार अपराधों पर लगेगा अंकुश
अधिकारियों के अनुसार, सुंदरबन घुसपैठ का सबसे बड़ा मार्ग नहीं है, लेकिन तस्करी और अन्य सीमा पार अपराधों के लिए इसका समय-समय पर इस्तेमाल होता रहा है। ऐसे में फेंसिंग और आधुनिक निगरानी प्रणाली लागू होने के बाद इन गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण की उम्मीद जताई जा रही है।
भूमि अधिग्रहण को लेकर स्थानीय लोगों की चिंता
परियोजना को लेकर कुछ स्थानीय परिवारों और होटल-लॉज संचालकों ने भूमि अधिग्रहण और संभावित विस्थापन को लेकर अपनी चिंताएं जताई हैं। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि प्रभावित लोगों को नियमानुसार मुआवजा और पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। जल्द ही BSF और संबंधित विभागों की संयुक्त टीम विस्तृत भूमि सर्वेक्षण शुरू करेगी, जिसके आधार पर परियोजना के अगले चरण की कार्रवाई आगे बढ़ेगी।





