राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में बड़ा खुलासा! भर्ती के कुछ ही दिनों में मनीष बना गिरोह का सरगना, CCTV ने खोली पूरी साजिश
अयोध्या: श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे पूरे नेटवर्क की परतें खुलती जा रही हैं। जांच में सामने आया है कि रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू का भतीजा मनीष यादव गणना टीम में शामिल होने के कुछ ही दिनों बाद कथित तौर पर चढ़ावा चोरी गिरोह का प्रमुख सदस्य बन गया। विशेष जांच दल (एसआईटी) की रिपोर्ट के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज में तीन लोग सीधे तौर पर नोटों की गड्डियां निकालते दिखाई दिए हैं।
फुटेज के मुताबिक अविनाश शुक्ला, मनीष यादव और रमाशंकर मिश्रा कथित रूप से चढ़ावे की रकम निकालते नजर आए, जबकि तीन अन्य कर्मचारी इनके आसपास घेरा बनाकर खड़े हो जाते थे, जिससे कैमरों में गतिविधियां स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड न हो सकें।
CCTV फुटेज से सामने आई पूरी कहानी
एसआईटी रिपोर्ट के अनुसार, मनीष यादव की नियुक्ति उसके ताऊ रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू की सिफारिश पर हुई थी। भर्ती के लिए आवश्यक दस्तावेज एसबीआई से जुड़े रत्नेश चतुर्वेदी को उपलब्ध कराए गए, जिसके बाद सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज के माध्यम से संविदा प्रक्रिया पूरी की गई।
रिकॉर्ड के अनुसार मनीष यादव की नियुक्ति 15 अप्रैल 2026 को हुई थी। इसके बाद 11 मई 2026 की सीसीटीवी फुटेज में वह कथित रूप से चढ़ावे की नकदी निकालते हुए दिखाई दिया।
महज 50 दिन में मिली अहम भूमिका
जांच में यह भी सामने आया है कि ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के चालक रहे रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू स्वयं चोरी करते हुए कैमरे में नहीं दिखे, लेकिन जांच एजेंसियों को आशंका है कि उन्होंने अपने भतीजे को इस काम के लिए आगे किया।
मनीष यादव लगभग 50 दिन तक ही गणनाकर्मी के रूप में कार्यरत रहा, लेकिन इसी दौरान उसकी भूमिका तेजी से बढ़ गई। जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि कहीं उसकी नियुक्ति पहले से तय योजना के तहत तो नहीं कराई गई थी।
27 अप्रैल से 5 जून तक की फुटेज बनी अहम सबूत
एसआईटी को 27 अप्रैल से 5 जून 2026 तक की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग उपलब्ध हुई। जांच में इसी अवधि की फुटेज के आधार पर कथित चोरी के पूरे तरीके का खुलासा हुआ।
रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक नकदी और संपत्ति अविनाश शुक्ला के पास से बरामद हुई। जांच में मनीष यादव को उसका सहयोगी बताया गया है। वहीं अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय पर कथित तौर पर चोरी के दौरान सहयोग करने के आरोप हैं।
भर्ती के तुरंत बाद चोरी में शामिल होने पर उठे सवाल
जांच से जुड़े एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि किसी भी नए कर्मचारी को कार्य प्रणाली समझने में समय लगता है, लेकिन मनीष यादव कथित रूप से नियुक्ति के कुछ ही समय बाद चोरी की घटनाओं में शामिल दिखाई दिया। अधिकारियों का मानना है कि यह पहलू जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसकी विस्तृत पड़ताल की जा रही है।
जांच में यह भी सामने आया है कि रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू ट्रस्ट से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां अनधिकृत रूप से संभालता था। इसी वजह से गणना कक्ष में उसका प्रभाव भी माना जाता था। जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की भूमिका की जांच कर रही हैं।
टिन्नू और मनीष की पुलिस रिमांड की मांग
पुलिस ने रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू और मनीष यादव की सात दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड के लिए अदालत में आवेदन दिया है। विवेचक एवं क्षेत्राधिकारी अयोध्या आशुतोष तिवारी ने विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर कहा है कि दोनों आरोपियों से पूछताछ के दौरान मामले से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों का खुलासा और अन्य बरामदगी की संभावना है।
अदालत ने पुलिस की इस मांग पर सुनवाई के लिए शुक्रवार की तारीख निर्धारित की है।
79 लाख की बरामदगी और 3 करोड़ की आशंका पर उठे नए सवाल
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में रकम को लेकर भी नए सवाल सामने आ रहे हैं। शुरुआती जानकारी में करीब 79 लाख रुपये बरामद होने की बात कही गई थी, जबकि बाद में ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने लगभग 3 करोड़ रुपये की चोरी होने की आशंका जताई थी।
अब जांच के दौरान यह सवाल उठ रहा है कि 3 करोड़ रुपये के अनुमान का आधार क्या था। क्या यह दानपात्रों की गणना, ऑडिट, सीसीटीवी फुटेज, आरोपियों से पूछताछ या किसी अन्य साक्ष्य पर आधारित था, या फिर यह आंतरिक आकलन था। इन सभी पहलुओं की जांच अभी जारी है।





