ISRO से वैज्ञानिकों के इस्तीफों पर उठे सवालों के बीच सरकार का बड़ा भरोसा, बोली- गगनयान मिशन की रफ्तार पर नहीं पड़ेगा कोई असर

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नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से वैज्ञानिकों के इस्तीफों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने गगनयान मिशन और अन्य प्रमुख अंतरिक्ष परियोजनाओं को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वैज्ञानिकों का संस्थान में आना-जाना एक सामान्य प्रक्रिया है और इससे किसी भी राष्ट्रीय महत्व की अंतरिक्ष परियोजना की प्रगति प्रभावित नहीं होगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि गगनयान समेत सभी प्रमुख मिशन तय योजना के अनुसार आगे बढ़ रहे हैं।

हाल के महीनों में ISRO के कई वरिष्ठ वैज्ञानिकों के इस्तीफे की खबरें सामने आई थीं। इनमें लॉन्च व्हीकल मार्क-3 (LVM-3) परियोजना और चंद्रयान कार्यक्रम से जुड़े कुछ प्रमुख वैज्ञानिकों के नाम भी चर्चा में रहे। इसके बाद यह सवाल उठने लगे थे कि क्या इन इस्तीफों का असर भारत के महत्वाकांक्षी मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान पर पड़ सकता है।

ग्रुप-ए वैज्ञानिकों के नियम किए गए सख्त

इन्हीं चर्चाओं के बीच अंतरिक्ष विभाग ने गगनयान और अन्य रणनीतिक परियोजनाओं से जुड़े ग्रुप-ए वैज्ञानिकों के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और इस्तीफों से संबंधित नियमों को पहले की तुलना में अधिक सख्त कर दिया है। इसका उद्देश्य महत्वपूर्ण मिशनों में विशेषज्ञता की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना और रणनीतिक परियोजनाओं में कार्यरत वैज्ञानिकों के स्थानांतरण या इस्तीफों की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है।

‘ISRO किसी एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं’

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ISRO की कार्यप्रणाली किसी एक वैज्ञानिक पर आधारित नहीं है, बल्कि यह एक मजबूत संस्थागत व्यवस्था के तहत संचालित होती है। उन्होंने कहा कि किसी वरिष्ठ वैज्ञानिक के पद छोड़ने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित परियोजना रुक जाएगी। संस्थान में लगातार नए वैज्ञानिक जुड़ते रहते हैं और अनुभवी विशेषज्ञों का मार्गदर्शन भी परियोजनाओं को मिलता रहता है, जिससे कार्यों की निरंतरता बनी रहती है।

पूर्व अध्यक्ष सोमनाथ का दिया उदाहरण

मंत्री ने पूर्व ISRO अध्यक्ष डॉ. एस. सोमनाथ का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में भारत ने चंद्रयान-3 और आदित्य-L1 जैसे ऐतिहासिक मिशनों में सफलता हासिल की। हालांकि अब वे अपने पद पर नहीं हैं, लेकिन इससे गगनयान या अन्य अंतरिक्ष कार्यक्रमों की प्रगति पर कोई असर नहीं पड़ा। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष कार्यक्रम टीमवर्क और संस्थागत सहयोग पर आधारित दीर्घकालिक प्रक्रिया है।

निजी अंतरिक्ष क्षेत्र से बढ़े नए अवसर

सरकार ने माना कि निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के विस्तार के बाद वैज्ञानिकों के सामने नए अवसर उपलब्ध हुए हैं। निजी भागीदारी बढ़ने से शोध, नवाचार और रोजगार के नए विकल्प विकसित हुए हैं, जिसके चलते कुछ वैज्ञानिक निजी संस्थानों का रुख कर रहे हैं। इसके बावजूद सरकार का कहना है कि ISRO के पास प्रतिभाशाली वैज्ञानिकों की मजबूत टीम मौजूद है और नई नियुक्तियों की प्रक्रिया लगातार जारी है।

कुडनकुलम डेटा लीक पर भी सरकार ने दी सफाई

कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा परियोजना से जुड़े कथित डेटा लीक के मामले पर भी मंत्री ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार किसी भी संवेदनशील या रणनीतिक डेटा में सेंधमारी की पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं और तकनीकी स्तर पर सभी पहलुओं की समीक्षा जारी है। फिलहाल ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया है जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा या रणनीतिक परियोजनाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा हो।

सरकार ने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिकों के इस्तीफों और संगठनात्मक बदलावों के बावजूद भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप आगे बढ़ रहा है। गगनयान जैसे राष्ट्रीय महत्व के मिशनों के लिए सभी आवश्यक विशेषज्ञ संसाधन उपलब्ध हैं और भविष्य की परियोजनाओं की तैयारियां भी लगातार जारी हैं।

 

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