ग्लासगो में भारत का जलवा, दिलीप गावित ने रचा इतिहास, श्रीशंकर ने जीता सिल्वर; बॉक्सिंग में 10 पदक पक्के

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नई दिल्ली: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। ग्लासगो में खेलों के सातवें दिन भारत ने एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स में दमदार प्रदर्शन करते हुए कई बड़ी उपलब्धियां अपने नाम कीं। पैरा एथलीट दिलीप महादु गावित ने पुरुषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया। उन्होंने 10.71 सेकंड का समय निकालते हुए नया गेम्स रिकॉर्ड भी बनाया। इस उपलब्धि के साथ वह कॉमनवेल्थ गेम्स की पैरा ट्रैक स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष एथलीट बन गए। वहीं मोहम्मद बासिल ने 10.83 सेकंड के समय के साथ रजत पदक जीतकर भारत को शानदार वन-टू फिनिश दिलाई।

श्रीशंकर ने लगातार दूसरी बार जीता रजत पदक

भारत के स्टार लंबी कूद खिलाड़ी मुरली श्रीशंकर ने पुरुषों की लंबी कूद स्पर्धा में 8.09 मीटर की सर्वश्रेष्ठ छलांग लगाकर रजत पदक अपने नाम किया। यह कॉमनवेल्थ गेम्स में उनका लगातार दूसरा सिल्वर मेडल है। इससे पहले उन्होंने बर्मिंघम 2022 में भी रजत पदक जीता था। फाइनल मुकाबले में जमैका के ताजे गेल ने 8.15 मीटर की छलांग लगाकर स्वर्ण पदक हासिल किया, जबकि स्कॉटलैंड के स्टीफन मैकेंजी ने कांस्य पदक अपने नाम किया। श्रीशंकर पूरे मुकाबले के दौरान लगातार पदक की दौड़ में बने रहे और शानदार प्रदर्शन किया।

मुक्केबाजी में भारत के 10 पदक हुए तय

एथलेटिक्स के साथ-साथ भारतीय मुक्केबाजों ने भी शानदार प्रदर्शन किया। भारतीय बॉक्सिंग दल के सभी 10 खिलाड़ियों ने अपने-अपने मुकाबले जीतकर सेमीफाइनल में जगह बना ली है। कॉमनवेल्थ गेम्स के नियमों के अनुसार सेमीफाइनल में पहुंचने वाला प्रत्येक खिलाड़ी कम से कम कांस्य पदक का दावेदार होता है। ऐसे में भारत ने मुक्केबाजी में कम से कम 10 पदक पहले ही सुनिश्चित कर लिए हैं। यह उपलब्धि बर्मिंघम 2022 के प्रदर्शन से भी बेहतर मानी जा रही है।

पदक तालिका में भारत की स्थिति हुई मजबूत

इन शानदार प्रदर्शनों के बाद भारत की पदक तालिका और मजबूत हो गई है। भारतीय दल के खाते में अब कुल 15 पदक हो चुके हैं, जिनमें 3 स्वर्ण, 9 रजत और 3 कांस्य पदक शामिल हैं। एथलेटिक्स और पैरा एथलेटिक्स में लगातार मिल रही सफलता से भारतीय दल का मनोबल भी काफी बढ़ा है।

फाइनल मुकाबलों पर टिकी हैं निगाहें

दिलीप महादु गावित की ऐतिहासिक जीत और मुरली श्रीशंकर के शानदार प्रदर्शन ने एक बार फिर भारतीय एथलेटिक्स की बढ़ती ताकत को साबित किया है। वहीं मुक्केबाजों के दमदार प्रदर्शन ने आने वाले दिनों में भारत के पदकों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद जगा दी है। अब खेल प्रेमियों की नजर आगामी फाइनल मुकाबलों पर टिकी है, जहां भारतीय खिलाड़ियों के पास कई और पदक जीतने का मौका होगा।

 

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