धार भोजशाला विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का अहम आदेश, दरगाह की जमीन पर जुमे की नमाज की दी अनुमति
नई दिल्ली: मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम अंतरिम निर्देश जारी किया है। अदालत ने मध्य प्रदेश प्रशासन को निर्देश दिया कि शुक्रवार की नमाज के लिए भोजशाला परिसर से सटी दरगाह की भूमि पर मुस्लिम समुदाय को नमाज अदा करने की अनुमति दी जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि खसरा नंबर 596 की भूमि, जिसे दरगाह की जमीन बताया गया है, पर शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक जुमे की नमाज अदा की जा सकेगी।
खसरा नंबर 596 की भूमि पर नमाज की अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित स्थान विवादित परिसर के बिल्कुल समीप स्थित है और फिलहाल नमाज के लिए उपयुक्त प्रतीत होता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि दोनों पक्ष आपसी सहमति से किसी अन्य वैकल्पिक स्थान पर सहमत होते हैं तो यह आदेश उस व्यवस्था में बाधा नहीं बनेगा।
सुनवाई में दरगाह भूमि का भी हुआ उल्लेख
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अहमदी ने अदालत से अनुरोध किया कि साइट प्लान में “दरगाह भूमि” के रूप में चिह्नित क्षेत्र को भी शुक्रवार की नमाज के लिए विचार में लिया जाए। इसके बाद अदालत ने उक्त भूमि पर निर्धारित समय के दौरान नमाज की अनुमति देने का निर्देश जारी किया।
राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट की दोटूक टिप्पणी
सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने कहा कि राज्य सरकार दो पक्षों के अधिकारों के विवाद में नहीं पड़ना चाहती और उसका मुख्य उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी राज्य का दायित्व केवल शांति व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं, बल्कि नागरिकों के संवैधानिक और धार्मिक अधिकारों की रक्षा करना भी है।
कानून-व्यवस्था के साथ धार्मिक अधिकारों की सुरक्षा भी जिम्मेदारी
जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने सुनवाई के दौरान कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ राज्य सरकार पर नागरिकों के धार्मिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी संवैधानिक जिम्मेदारी है। अदालत की इस टिप्पणी को मामले की सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण माना जा रहा है।





