रिसर्च में बड़ा खुलासा: डायबिटीज मरीजों में हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा, कम नींद भी बन रही जानलेवा वजह

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नई दिल्ली: डायबिटीज और हृदय रोगों के बीच संबंध को लेकर सामने आए नए शोध ने चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों के मुताबिक मधुमेह केवल ब्लड शुगर तक सीमित बीमारी नहीं है, बल्कि यह समय के साथ हृदय समेत शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकती है। हालिया रिसर्च में यह भी सामने आया है कि हार्ट अटैक के कई मरीजों को पहले से डायबिटीज होती है, लेकिन उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं होती।

कम नींद बढ़ा सकती है हार्ट अटैक का खतरा

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने अपनी रिपोर्ट में पर्याप्त नींद को हृदय स्वास्थ्य का अहम आधार माना है। रिपोर्ट के अनुसार, शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार, वजन, रक्त शर्करा, कोलेस्ट्रॉल, रक्तचाप और निकोटीन से दूरी के साथ-साथ अच्छी नींद भी हृदय रोग के जोखिम को प्रभावित करती है।

शोध में पाया गया कि जो लोग नियमित रूप से रात में छह घंटे से कम सोते हैं, उनमें मोटापा, उच्च रक्तचाप, टाइप-2 डायबिटीज और हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है। एसोसिएशन के अध्यक्ष डोनाल्ड एम. लॉयड जोन्स के अनुसार, स्वस्थ नींद की आदतें संपूर्ण स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

विशेषज्ञों ने दी 7 से 8 घंटे की नींद की सलाह

एक रिपोर्ट में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. ब्रायन पिंटो के हवाले से कहा गया है कि जिन लोगों की नींद सात घंटे से कम होती है, उनमें दिल का दौरा पड़ने की संभावना अधिक देखी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि रोजाना सात से आठ घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद हृदय को स्वस्थ रखने में मददगार हो सकती है।

हार्ट अटैक के 50% मरीजों में मिला डायबिटीज का संबंध

ग्लोबल हेल्थ जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, हार्ट अटैक के लगभग 50 प्रतिशत मरीजों में डायबिटीज पाई गई। अध्ययन में यह भी सामने आया कि बड़ी संख्या में मरीजों को पहले से यह जानकारी ही नहीं थी कि वे मधुमेह से पीड़ित हैं।

यह अध्ययन जनवरी 2019 से फरवरी 2020 के बीच उत्तर भारत के 3,523 मरीजों पर किया गया। इसमें दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल और जनकपुरी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के मरीज शामिल थे। अध्ययन के अनुसार, केवल 855 मरीजों (करीब 24 प्रतिशत) को पहले से डायबिटीज होने की जानकारी थी, जबकि बाकी मरीज अपनी बीमारी से अनजान थे।

समय पर जांच से कम हो सकता है जोखिम

अध्ययन से जुड़े डॉक्टर मोहित गुप्ता के अनुसार, जिन मरीजों को पहले से डायबिटीज की जानकारी थी और जो नियमित उपचार व नियंत्रण में थे, उनमें हार्ट अटैक का खतरा अपेक्षाकृत कम पाया गया। उन्होंने सलाह दी कि 18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को समय-समय पर ब्लड शुगर की जांच करानी चाहिए, ताकि मधुमेह का समय रहते पता चल सके और गंभीर जटिलताओं से बचाव हो सके।

ध्वनि प्रदूषण भी बन सकता है नया जोखिम कारक

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ध्वनि प्रदूषण को भी हृदय रोगों के प्रमुख जोखिम कारकों की सूची में शामिल किया जा सकता है। उनका कहना है कि लगातार शोरगुल वाले वातावरण में रहने से भी हृदय स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

 

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