राम मंदिर ट्रस्ट पर उठे बड़े सवाल! पुनर्गठन की मांग तेज, पीएम मोदी को भेजा गया पत्र; महंत धर्मदास ने संतों को सौंपने की कही जिम्मेदारी

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लखनऊ: राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को लेकर नई बहस छिड़ गई है। मामले के सामने आने के बाद ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग जोर पकड़ने लगी है। भाजपा विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर ट्रस्ट की संरचना में बदलाव की मांग की है। वहीं हनुमानगढ़ी के महंत धर्मदास ने मंदिर के धार्मिक और प्रशासनिक संचालन की जिम्मेदारी साधु-संतों को सौंपने की वकालत की है।

पीएम मोदी को पत्र भेजकर रखा पुनर्गठन का प्रस्ताव

गोरखपुर-फैजाबाद स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में ट्रस्ट की वर्तमान संरचना में बदलाव का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा है कि ट्रस्ट में भगवान श्रीराम के वंशजों, राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कारसेवकों के परिजनों तथा आंदोलन के प्रमुख चेहरों को भी प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे ट्रस्ट की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी और श्रद्धालुओं का भरोसा और मजबूत होगा।

महंत धर्मदास बोले- धार्मिक व्यवस्था संत समाज संभाले

हनुमानगढ़ी के महंत धर्मदास ने भी ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि मंदिर से जुड़े धार्मिक और प्रशासनिक कार्यों का संचालन साधु-संतों के हाथों में होना चाहिए। उनके अनुसार ट्रस्ट वित्तीय प्रबंधन और लेखा-जोखा देख सकता है, लेकिन धार्मिक परंपराओं, पूजा-पद्धति और मंदिर व्यवस्था का संचालन संत समाज द्वारा किया जाना अधिक उपयुक्त रहेगा।

मायावती ने दी सख्त कार्रवाई की सलाह

बहुजन समाज पार्टी प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यदि मीडिया में सामने आ रही खबरें सही हैं तो यह बेहद गंभीर विषय है और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे मामले को राजनीतिक रंग देने से बचना चाहिए।

पुलिस की भूमिका को लेकर भी उठ रहे सवाल

चढ़ावा चोरी प्रकरण में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सामने आए एक कथित सीसीटीवी वीडियो में पुलिसकर्मी अविनाश शुक्ला कुछ लोगों के साथ एक वाहन में बैठते हुए दिखाई दे रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि उस समय एक बैग भी साथ था, जिसमें बरामद धनराशि रखी गई थी। हालांकि वीडियो और उससे जुड़े दावों की अभी तक स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

मामला सार्वजनिक होने के बाद जांच ने पकड़ी रफ्तार

जानकारी के मुताबिक 6 जून को मामला सार्वजनिक होने के बाद इस पर व्यापक चर्चा शुरू हुई। इसके बाद विशेष जांच दल गठित करने की मांग उठी। प्रारंभिक जांच पूरी होने के बाद 23 जून को इस संबंध में एफआईआर दर्ज की गई।

एफआईआर से पहले पुलिस ने नहीं की थी सार्वजनिक टिप्पणी

सूत्रों के अनुसार एफआईआर दर्ज होने से पहले पुलिस अधिकारियों ने मामले पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से परहेज किया था। अधिकारियों का कहना था कि औपचारिक शिकायत प्राप्त न होने के कारण पुलिस की प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी। अब जांच एजेंसियां सीसीटीवी फुटेज, उपलब्ध साक्ष्यों और पूरे घटनाक्रम के आधार पर विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही हैं।

 

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