ऑनलाइन कैब बुकिंग में बड़ा बदलाव, अब नहीं दिखेगा ‘एडवांस टिप’ का विकल्प; जानें नए नियम

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने ऑनलाइन कैब बुकिंग से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। ओला, उबर समेत देशभर के सभी कैब एग्रीगेटर्स के मोबाइल ऐप पर अब यात्रियों से बुकिंग के समय या राइड के दौरान टिप मांगने की व्यवस्था पर रोक लगा दी गई है। ऐसे में कैब बुक करते वक्त 10, 15 या 20 रुपये जैसी तय रकम की टिप देने का विकल्प अब ऐप पर नहीं दिखाई देगा।

राइड पूरी होने के बाद ही मिलेगा टिप का विकल्प

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन एग्रीगेटर्स के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इनके मुताबिक, यात्री को टिप देने की सुविधा केवल राइड पूरी होने के बाद उपलब्ध कराई जा सकती है। बुकिंग के दौरान, राइड शुरू होने से पहले या यात्रा के बीच टिप से संबंधित कोई प्रॉम्प्ट, पॉप-अप या विकल्प ऐप पर नहीं दिखाया जा सकेगा।

नए निर्देशों के तहत ऐसी किसी भी व्यवस्था पर भी रोक रहेगी, जिसमें यात्री को यह संकेत मिले कि टिप देने से उसकी राइड जल्दी पक्की हो जाएगी या ड्राइवर उसकी बुकिंग को प्राथमिकता देते हुए जल्द स्वीकार करेगा।

सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?

सरकार का कहना है कि टिप पूरी तरह यात्री की स्वेच्छा पर निर्भर होनी चाहिए। यदि कोई यात्री अपनी यात्रा के अनुभव से संतुष्ट होकर ड्राइवर को अतिरिक्त रकम देना चाहता है, तो उसे यह विकल्प राइड समाप्त होने के बाद मिलना चाहिए।

इस बदलाव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यात्री जल्द कैब मिलने, राइड की पुष्टि होने या किसी अन्य उम्मीद के चलते दबाव में आकर टिप देने के लिए मजबूर न हो। टिप देने का फैसला पूरी तरह यात्री की संतुष्टि और यात्रा के अनुभव पर आधारित होना चाहिए।

टिप की पूरी रकम ड्राइवर को देनी होगी

नए दिशा-निर्देशों में टिप की रकम को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था की गई है। यात्री द्वारा दी गई पूरी टिप सीधे ड्राइवर के खाते में जमा होनी चाहिए। कैब एग्रीगेटर इस रकम में से किसी भी तरह का कमीशन, सेवा शुल्क या अन्य हिस्सा नहीं काट सकता।

यदि कोई कंपनी टिप की रकम में कटौती करती है, तो इसे नियमों का उल्लंघन माना जाएगा और उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

टिप के लिए दबाव बनाने पर भी कार्रवाई

कैब ऐप पर ऐसे संदेश, संकेत या विकल्प भी नहीं दिखाए जा सकेंगे, जो यात्री पर टिप देने का मनोवैज्ञानिक दबाव बनाएं। यदि किसी ऐप के जरिए यह संकेत दिया जाता है कि टिप देने पर ड्राइवर राइड को प्राथमिकता देगा, जल्दी स्वीकार करेगा या यात्री को कैब जल्द मिल जाएगी, तो इसे गलत व्यावसायिक प्रथा माना जाएगा।

ये दिशा-निर्देश ओला, उबर समेत देशभर में काम करने वाले सभी कैब एग्रीगेटर्स पर समान रूप से लागू होंगे।

 

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