ट्रेनों की टॉयलेट से 40 फीसदी यात्री परेशान, CAG रिपोर्ट में रेलवे की सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल; सर्वे में सामने आई बड़ी तस्वीर

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नई दिल्ली: भारतीय रेलवे की सफाई व्यवस्था को लेकर नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक यानी कैग की रिपोर्ट में गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेन में सफाई व्यवस्था से आधे यात्री संतुष्ट नहीं हैं। वहीं, सर्वेक्षण में 40 प्रतिशत से अधिक यात्रियों ने टॉयलेट में बदबू और जलभराव की शिकायत की है। रिपोर्ट में बायो-टॉयलेट के रखरखाव और सफाई के लिए निर्धारित बजट के इस्तेमाल को लेकर भी कई अनियमितताएं सामने आई हैं।

ऑन-बोर्ड सफाई से 50 फीसदी यात्री असंतुष्ट

लंबी दूरी की ट्रेन यात्रा में यात्रियों के लिए टॉयलेट की उपलब्धता जरूरी सुविधा होती है, लेकिन कैग के सर्वे में यही सुविधा बड़ी परेशानी के रूप में सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रेन में ऑन-बोर्ड सफाई व्यवस्था से 50 प्रतिशत यात्रियों ने असंतोष जताया। सफाई व्यवस्था को लेकर सामने आई यह स्थिति लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों की सुविधा और स्वास्थ्य से सीधे जुड़ी है।

कैग ने बुधवार को संसद में पेश की गई रिपोर्ट में रेलवे की सफाई व्यवस्था, बायो-टॉयलेट के रखरखाव और इसके लिए उपलब्ध बजटीय प्रावधानों के इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि बजट की कमी नहीं होने के बावजूद जमीनी स्तर पर कामकाज और वित्तीय अनुशासन की स्थिति संतोषजनक नहीं रही।

सफाई बजट के खर्च का पारदर्शी हिसाब नहीं

रिपोर्ट में सबसे अहम वित्तीय अनियमितताओं में से एक सफाई और रखरखाव पर खर्च होने वाले बजट का स्पष्ट लेखा-जोखा नहीं मिलना है। रेलवे स्वच्छता और रखरखाव के लिए हर साल सैकड़ों करोड़ रुपये का बजट आवंटित करता है, लेकिन ऑडिट टीम को यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा सकी कि आवंटित राशि में से वास्तव में कितना पैसा सफाई पर खर्च हुआ और कितनी रकम इस्तेमाल नहीं हो सकी।

कैग के अनुसार, बजटीय आंकड़ों और वित्तीय कार्रवाई से जुड़े सटीक रिकॉर्ड का पारदर्शी तरीके से उपलब्ध नहीं होना रिपोर्ट में प्रमुख अनियमितताओं में शामिल है।

ठेकेदारों पर जुर्माने का भी नहीं मिला रिकॉर्ड

ठेकेदारों द्वारा नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई को लेकर भी रेलवे की व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जुर्माना लगाने या भुगतान में कटौती से संबंधित कोई पारदर्शी और केंद्रीय रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया।

रेलवे की ओर से ऐसी कार्रवाई किए जाने का दावा किया गया, लेकिन ऑडिट टीम को न तो उसके पर्याप्त साक्ष्य मिले और न ही कुल जुर्माने की राशि का रिकॉर्ड उपलब्ध कराया जा सका।

40 फीसदी से ज्यादा यात्रियों ने टॉयलेट की बदबू की शिकायत की

सर्वेक्षण के दौरान जमीनी स्थिति भी चिंताजनक पाई गई। 40 प्रतिशत से अधिक यात्रियों ने टॉयलेट में बदबू और जलभराव को लेकर असंतोष जताया। वहीं, 50 प्रतिशत से अधिक यात्री ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग सेवाओं और सफाई कर्मचारियों की अनुपस्थिति से नाखुश मिले।

रिपोर्ट में डिब्बों की आधुनिक सफाई के लिए स्वीकृत ऑटोमेटिक कोच वाशिंग प्लांट जैसी परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाए गए हैं। इनके समयबद्ध कार्यान्वयन की स्थिति शून्य प्रतिशत रही। झांसी और ग्वालियर जैसे प्रमुख स्टेशनों के लिए बजट उपलब्ध होने के बावजूद संबंधित परियोजनाएं लंबित रहीं।

 

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