ईरान पर अमेरिका की बड़ी नरमी! तेल बिक्री से हटाया प्रतिबंध, भारत समेत दुनिया को मिल सकती है राहत
तेहरान: अमेरिका ने ईरान के तेल क्षेत्र पर लगे कड़े प्रतिबंधों में अस्थायी ढील देते हुए बड़ा फैसला लिया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान को 60 दिनों की राहत प्रदान की है, जिसके तहत वह 21 अगस्त तक कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री कर सकेगा। इस फैसले का असर केवल वैश्विक ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों को भी इसका लाभ मिलने की संभावना है।
अमेरिका और ईरान के बीच 17 जून को 60 दिनों के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। ईरान को मिली यह छूट उसी समझौते का हिस्सा मानी जा रही है। समझौते के तहत ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने का वादा किया है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग माना जाता है।
समझौते में एक और महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल है, जिसके तहत ईरान अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के निरीक्षकों को अपने देश में निरीक्षण की अनुमति देगा। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्विट्जरलैंड में हुई वार्ता को सकारात्मक बताते हुए इसे दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण प्रगति करार दिया है।
दुनिया के अधिकांश देशों को बेच सकेगा तेल
अमेरिकी राहत मिलने के बाद ईरान अब दुनिया के अधिकांश देशों को कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद बेच सकेगा। हालांकि उत्तर कोरिया, क्यूबा और क्रीमिया जैसे अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आने वाले क्षेत्रों को तेल निर्यात की अनुमति नहीं होगी। इस व्यवस्था की एक अहम विशेषता यह भी है कि ईरान को तेल की बिक्री का भुगतान अमेरिकी डॉलर में प्राप्त करने की छूट दी गई है।
क्या अमेरिका भी खरीदेगा ईरानी तेल?
साल 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से अमेरिका ने ईरान से तेल आयात नहीं किया है। हालांकि अमेरिकी ट्रेजरी सचिव द्वारा जारी नए सामान्य लाइसेंस में यह प्रावधान रखा गया है कि यदि तेल की बिक्री, आपूर्ति या उतारने की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आवश्यक हुआ तो ईरानी तेल का आयात अमेरिका में भी किया जा सकता है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
ईरान कभी भारत के प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ताओं में शामिल था। वर्ष 2019 में अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों से पहले भारत बड़ी मात्रा में ईरान से कच्चा तेल खरीदता था। दक्षिण कोरिया, जापान, ग्रीस, ताइवान, इटली और तुर्की भी ईरानी तेल के प्रमुख खरीदार देशों में शामिल थे।
वर्ष 2009 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में ईरान की हिस्सेदारी लगभग 14 प्रतिशत थी और वह देश का दूसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता था। लेकिन 2019 में अमेरिकी प्रतिबंध दोबारा लागू होने के बाद भारत ने ईरान से तेल आयात पूरी तरह बंद कर दिया था।
वैश्विक बाजार में तेल आपूर्ति को लेकर जारी अनिश्चितता और बढ़ती मांग के बीच अमेरिका की ओर से दी गई यह 60 दिन की छूट भारत के लिए राहत भरी साबित हो सकती है। इससे भविष्य में तेल आपूर्ति के विकल्प बढ़ने और कीमतों पर दबाव कम होने की संभावना जताई जा रही है।
रूस से रिकॉर्ड स्तर पर तेल खरीद रहा भारत
वर्तमान में भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा रूस से पूरा कर रहा है। बाजार विश्लेषण फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, जून महीने में भारत ने रूस से प्रतिदिन 26 लाख बैरल तेल का आयात किया है। यह मात्रा इसी अवधि में भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 54 प्रतिशत हिस्सा है। ऐसे में ईरानी तेल की बाजार में वापसी वैश्विक ऊर्जा व्यापार के समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।





