कोरोना के बाद इबोला का कहर! कांगो में 3,007 मौतें, 6,186 संक्रमित; छह प्रांतों तक फैली महामारी
ब्राजाविले: अफ्रीका में इबोला के बढ़ते प्रकोप ने चिंता बढ़ा दी है। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इस बीमारी से मरने वालों की संख्या 3,007 तक पहुंच गई है, जबकि संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 6,186 हो गई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बीमारी का प्रकोप देश के छह प्रांतों तक फैल चुका है और इसे रोकने के लिए कांगो सरकार, विश्व स्वास्थ्य संगठन और सहायता समूह लगातार अभियान चला रहे हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल कांगो में इबोला का प्रकोप उत्तर-पूर्वी हिस्से में तेजी से फैल रहा है। इसे देश में अब तक के सबसे गंभीर प्रकोपों में से एक माना जा रहा है। हजारों लोगों की मौत और संक्रमण के लगातार बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
15 मई को आधिकारिक घोषणा, जनवरी से प्रकोप की आशंका
इबोला के फैलने की आधिकारिक घोषणा 15 मई को इतुरी प्रांत में की गई थी। हालांकि, कुछ स्वास्थ्य अधिकारियों और विशेषज्ञों का मानना है कि इस बीमारी का प्रकोप संभवतः जनवरी 2026 में ही शुरू हो गया था। इसके बाद संक्रमण धीरे-धीरे दूसरे इलाकों तक फैलता चला गया।
कांगो के अधिकारियों, विश्व स्वास्थ्य संगठन और राहत संगठनों की ओर से बीमारी पर नियंत्रण पाने की कोशिशें जारी हैं। हालांकि कमजोर निगरानी व्यवस्था, असुरक्षा और समुदायों के बीच विरोध के कारण संक्रमित मरीजों की समय पर पहचान और उपचार में मुश्किलें सामने आ रही हैं।
अस्पताल के बाहर हो रही करीब 60 फीसदी मौतें
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के मुताबिक इबोला से होने वाली करीब 60 प्रतिशत मौतें अस्पतालों के बाहर हो रही हैं। इससे बीमारी की पहचान और संक्रमित लोगों तक समय पर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की चुनौती का अंदाजा लगाया जा सकता है।
2026 का यह प्रकोप 2018 से 2020 के दौरान कांगो में फैली महामारी को पीछे छोड़ते हुए देश के इतिहास का सबसे बड़ा और सबसे घातक इबोला प्रकोप बनता जा रहा है। कांगो में इस बार के प्रकोप को लेकर लोगों में डर बढ़ रहा है। इसकी तुलना पश्चिम अफ्रीका में 2014 से 2016 के बीच फैले घातक इबोला प्रकोप से भी की जा रही है।
2014-16 में 28,600 से ज्यादा संक्रमित हुए थे
एक दशक पहले गिनी, लाइबेरिया और सिएरा लियोन में इबोला का बड़ा प्रकोप फैला था। उस दौरान 28,600 से ज्यादा लोग संक्रमित हुए थे, जबकि 11,000 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। उस महामारी ने पश्चिम अफ्रीका के साथ-साथ पूरी दुनिया में स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा कर दी थी।
दुनिया पहले भी कई घातक महामारियां देख चुकी है
इतिहास में इबोला के अलावा कई ऐसी महामारियां सामने आ चुकी हैं, जिन्होंने बड़ी संख्या में लोगों की जान ली। अमेरिका की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के मुताबिक कोविड महामारी से पहले 1918-1919 की इन्फ्लुएंजा महामारी को मानव इतिहास की सबसे घातक महामारियों में माना जाता था।
करीब 108 साल पहले इन्फ्लुएंजा वायरस ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों को एक साथ प्रभावित किया था। उस समय 5 करोड़ से 10 करोड़ लोगों की मौत होने का अनुमान है। इसके बाद 1957-58 का एशियाई फ्लू, 1968-69 का हांगकांग फ्लू और 2009-10 का स्वाइन फ्लू भी दुनियाभर में चिंता का कारण बने।
कोरोना से आधिकारिक तौर पर 71 लाख मौतें दर्ज
कोरोनावायरस महामारी के दौरान दुनियाभर में आधिकारिक तौर पर करीब 71 लाख मौतों की पुष्टि हुई थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य स्वतंत्र आंकड़ा एजेंसियों के अनुमानों के मुताबिक अगर महामारी के दौरान हुई अप्रत्यक्ष और अतिरिक्त मौतों को भी शामिल किया जाए तो वास्तविक संख्या 1.8 करोड़ से 3 करोड़ के बीच हो सकती है।
पुरानी महामारियों के दौर की तुलना में आज चिकित्सा विज्ञान, टीके, दवाएं और जीवन रक्षक उपकरण काफी विकसित हो चुके हैं। इसके बावजूद इबोला जैसे घातक वायरस के बढ़ते प्रकोप ने एक बार फिर वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा और समय पर बीमारी की पहचान की अहमियत को सामने ला दिया है।





