कच्चे तेल में भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद मई से स्थिर पेट्रोल-डीजल के दाम, जानें आज के रेट

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नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल के दाम फिलहाल स्थिर हैं। सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में करीब 3.50 डॉलर प्रति बैरल की बड़ी गिरावट के बाद मंगलवार को मामूली तेजी देखने को मिली। ब्रेंट क्रूड अब भी 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा है, लेकिन ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 22 सितंबर को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया। देश में मई के बाद से पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर बने हुए हैं।

पेट्रोल-डीजल के आज के रेट

22 सितंबर को आंध्र प्रदेश के चित्तूर में पेट्रोल देश में सबसे महंगा 118.34 रुपये प्रति लीटर है। यहां डीजल की कीमत 106.06 रुपये प्रति लीटर है। वहीं, देश में सबसे सस्ता पेट्रोल 88.66 रुपये प्रति लीटर और डीजल 84.56 रुपये प्रति लीटर है।

राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर है। दिल्ली की तुलना में चित्तूर में पेट्रोल 16.22 रुपये और डीजल 10.86 रुपये प्रति लीटर महंगा है। दूसरी ओर, पोर्ट ब्लेयर में पेट्रोल दिल्ली के मुकाबले 13.46 रुपये और डीजल 10.64 रुपये प्रति लीटर सस्ता मिल रहा है।

सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में क्यों आई गिरावट

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। सऊदी अरब से तेल की आपूर्ति बढ़ने के संकेत और ईरान युद्ध को लेकर कूटनीतिक बातचीत की संभावनाओं से बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता कुछ कम हुई। ब्रेंट क्रूड लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरा और करीब 3.4 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ। अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड में करीब 4.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

होर्मुज से बढ़ी तेल और एलएनजी की आवाजाही

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, तेल बाजार के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ा घटनाक्रम अहम रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर के अनुसार, पिछले दो सप्ताह में इस समुद्री मार्ग से कच्चे तेल और एलएनजी की आवाजाही छह महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है।

17 से 19 सितंबर के बीच अमेरिकी मदद से रोजाना करीब 32 जहाज होर्मुज से होकर गुजरे। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण है और यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ सकता है।

सऊदी अरब से तेल सप्लाई बढ़ने के संकेत

सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार, सप्ताहांत में फारस की खाड़ी में सऊदी अरब की तेल लोडिंग गतिविधियों में तेजी दिखाई दी। सऊदी अरब के प्रमुख खाड़ी बंदरगाह पर जून के बाद सबसे अधिक तेल टैंकर देखे गए। इससे संकेत मिले कि ड्रोन हमलों के चलते ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन बंद होने के बाद सऊदी अरब खाड़ी के रास्ते अपने तेल निर्यात को फिर से बढ़ाने में सक्षम हो रहा है।

ईरान-अमेरिका बातचीत की उम्मीद का भी असर

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के पीछे ईरान और अमेरिका के बीच संभावित बातचीत की उम्मीद भी एक वजह रही। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से कहा कि वह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मुलाकात के लिए “संभवतः” तैयार हो सकते हैं। दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़ने और युद्ध संबंधी तनाव कम होने की स्थिति में तेल की आपूर्ति को लेकर बाजार की चिंता घट सकती है।

तेल सप्लाई को लेकर जोखिम अभी कायम

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सऊदी अरब ने सप्ताहांत में राजधानी रियाद के लिए हवाई हमले की चेतावनी जारी की। लाल सागर के यानबू समेत कुछ अन्य क्षेत्रों के लिए भी चेतावनी जारी की गई। इसके अलावा, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों से सऊदी अरब को खतरा बना हुआ है। यूक्रेन की ओर से रूसी रिफाइनरियों पर किए गए हमलों से भी यूरोप और वैश्विक ईंधन बाजार में सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है।

लीबिया में भी तेल उत्पादन पर असर

लीबिया के सबसे बड़े तेल क्षेत्र शरारा में भी उत्पादन में बड़ी गिरावट की खबर है। देश की नेशनल ऑयल कॉरपोरेशन के अनुसार, एक सशस्त्र समूह ने पाइपलाइन बंद कर दी है। यदि पाइपलाइन लंबे समय तक बंद रहती है तो शरारा क्षेत्र से तेल का उत्पादन, परिवहन और निर्यात पूरी तरह प्रभावित हो सकता है। इससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका है।

 

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