प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यकाल के रिकॉर्ड में पंडित नेहरू को पीछे छोड़ा, सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्री बने
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के इतिहास में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज कर ली है। वह अब आजाद भारत में सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर बने रहने वाले नेता बन गए हैं। इस उपलब्धि के साथ उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है, जो लंबे समय तक देश के प्रधानमंत्री रहे थे।
नेहरू के रिकॉर्ड से आगे निकले पीएम मोदी
नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद लगातार कार्यकाल पूरा करते हुए उन्होंने 4,399 दिनों का कार्यकाल पूरा कर लिया है। इस तरह उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू के 4,398 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। नेहरू ने 1952 के बाद चुनी गई सरकारों के तहत यह रिकॉर्ड बनाया था।
आज़ादी के बाद नेहरू का लंबा कार्यकाल
पंडित जवाहरलाल नेहरू 1947 में देश के पहले प्रधानमंत्री बने थे और 27 मई 1964 तक इस पद पर रहे। उनका कुल कार्यकाल लंबा रहा, हालांकि उसमें अंतरिम सरकार का समय भी शामिल माना जाता है। 1952 के बाद निर्वाचित सरकार के आधार पर उनका कार्यकाल लगभग 12 साल 14 दिन का रहा।
मोदी का लगातार बढ़ता कार्यकाल
प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 से लेकर अब तक लगातार तीन कार्यकालों में नेतृत्व किया है। 9 जून को उन्होंने नेहरू के बाद सबसे लंबे निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में नया रिकॉर्ड स्थापित किया। राजनीतिक स्थिरता और लगातार जनादेश को इस उपलब्धि का प्रमुख आधार माना जा रहा है।
विकास और विदेश नीति पर केंद्रित विजन
लेख में बताया गया है कि मोदी सरकार का फोकस ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य पर है। सरकार सेमीकंडक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन, डिजिटल गवर्नेंस और स्पेस सेक्टर में तेज़ी से काम कर रही है। स्टार्टअप इकोसिस्टम के विस्तार और डिजिटल भुगतान प्रणाली को भी भारत की बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक विस्तार
बुलेट ट्रेन, एक्सप्रेसवे, आधुनिक रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डों के विस्तार जैसे प्रोजेक्ट्स को देश के विकास मॉडल का हिस्सा बताया गया है। डिजिटल इकोनॉमी और वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका को भी इस बदलाव का अहम पहलू माना जा रहा है।
विदेश नीति और वैश्विक भूमिका
विदेश नीति में भारत की भूमिका को ‘सक्रिय भागीदारी’ और ‘विश्वबंधु’ की अवधारणा के रूप में वर्णित किया गया है। रूस-यूक्रेन संकट से लेकर ग्लोबल साउथ की आवाज तक भारत की स्थिति को पहले से अधिक प्रभावशाली बताया गया है।
ऐतिहासिक तुलना और विकास की यात्रा
लेख में कहा गया है कि जहां नेहरू ने आधुनिक भारत की संस्थागत नींव रखी, वहीं वर्तमान नेतृत्व उस नींव पर आधुनिक और डिजिटल भारत का निर्माण कर रहा है। दोनों दौरों को अलग परिस्थितियों में देश निर्माण की अलग-अलग चरणों के रूप में देखा गया है।



