सरकारी दफ्तरों में अब परोसी जा सकती है ‘यूल टी’! केंद्र का बड़ा फैसला, सभी मंत्रालयों को भेजा गया प्रस्ताव

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार देशभर के केंद्रीय सरकारी कार्यालयों, बैठकों, सम्मेलनों और कैंटीनों में सरकारी स्वामित्व वाले चाय ब्रांड ‘यूल टी’ के उपयोग को बढ़ावा देने की तैयारी में है। आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रही एंड्रयू यूल एंड कंपनी लिमिटेड को संस्थागत स्तर पर समर्थन देने के उद्देश्य से भारी उद्योग मंत्रालय ने सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों से इस ब्रांड का इस्तेमाल करने की अपील की है।

मंत्रालय की ओर से जारी पत्र में सभी मंत्रालयों और विभागों से कहा गया है कि वे अपने अधीनस्थ कार्यालयों, संस्थानों और संगठनों को भी सरकारी चाय ब्रांड ‘यूल टी’ के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करें। यदि यह पहल व्यापक स्तर पर लागू होती है तो कंपनी को एक स्थिर और बड़ा संस्थागत बाजार मिल सकेगा।

सरकारी कंपनी को मिलेगा बड़ा सहारा

एंड्रयू यूल एंड कंपनी लिमिटेड असम और पश्चिम बंगाल में स्थित 15 चाय बागानों का संचालन करती है। कंपनी प्रीमियम गुणवत्ता वाली ऑर्थोडॉक्स, सीटीसी, ग्रीन और फ्लेवर्ड चाय का उत्पादन करती है। सरकार की इस पहल का उद्देश्य कंपनी की बिक्री बढ़ाने के साथ उसकी आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करना है।

संसदीय समिति की सिफारिश के बाद उठाया कदम

यह फैसला उद्योग संबंधी संसदीय स्थायी समिति की सिफारिश के बाद सामने आया है। समिति ने सुझाव दिया था कि केंद्र सरकार विभिन्न मंत्रालयों और सरकारी संस्थानों के माध्यम से एंड्रयू यूल एंड कंपनी के उत्पादों की बिक्री और उपयोग को बढ़ावा दे। इसी सिफारिश के आधार पर भारी उद्योग मंत्रालय ने सभी केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों को यह प्रस्ताव भेजा है।

सरकारी आयोजनों में बढ़ सकता है इस्तेमाल

यदि मंत्रालयों और विभागों की ओर से इस प्रस्ताव को व्यापक रूप से अपनाया जाता है तो आने वाले समय में सरकारी बैठकों, सम्मेलनों, कार्यालयों और कैंटीनों में ‘यूल टी’ का इस्तेमाल आम हो सकता है। इससे सरकारी कंपनी को नियमित मांग मिलने के साथ उसके कारोबार को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

 

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