“सेना और ISI पर कितना खर्च?” अमेरिका ने पाकिस्तान से मांगा हिसाब, बजट में पारदर्शिता बढ़ाने का दबाव
नई दिल्ली: पाकिस्तान की वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने को लेकर अमेरिका ने इस्लामाबाद के सामने कई अहम सिफारिशें रखी हैं। अमेरिकी विदेश विभाग की वित्तीय पारदर्शिता रिपोर्ट 2026 में पाकिस्तान के बजट और सरकारी वित्तीय व्यवस्था का आकलन किया गया है। रिपोर्ट में खास तौर पर सेना और खुफिया एजेंसियों पर होने वाले खर्च को संसदीय या नागरिक निगरानी के दायरे में लाने पर जोर दिया गया है।
अमेरिकी आकलन के मुताबिक पाकिस्तान में सैन्य और खुफिया एजेंसियों के सरकारी खर्च से जुड़ी जानकारी को अधिक पारदर्शी बनाने की जरूरत है। अमेरिका चाहता है कि इन एजेंसियों के बजट और खर्च की निगरानी के लिए स्पष्ट व्यवस्था हो और नागरिक संस्थाओं को इनसे जुड़ी वित्तीय जानकारी प्रभावी तरीके से उपलब्ध कराई जाए।
सेना और खुफिया बजट पर अमेरिका की खास नजर
रिपोर्ट में पाकिस्तान के सैन्य और खुफिया बजट को लेकर विशेष चिंता जताई गई है। अमेरिका ने सैन्य एवं खुफिया एजेंसियों के खर्च पर प्रभावी नागरिक निगरानी सुनिश्चित करने और वित्तीय पारदर्शिता मजबूत करने की जरूरत बताई है। अमेरिकी विदेश विभाग विभिन्न देशों की वित्तीय पारदर्शिता का आकलन करते समय सैन्य और खुफिया बजट पर नागरिक निगरानी को महत्वपूर्ण मानता रहा है।
सरकारी कर्ज और कंपनियों की देनदारी का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग
अमेरिका ने पाकिस्तान से सरकारी कर्ज और बड़ी सरकारी कंपनियों की देनदारियों से संबंधित विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने को भी कहा है। अमेरिकी रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान के बजट से जुड़ी काफी जानकारी उपलब्ध है और बजट दस्तावेजों में सरकार की आय तथा खर्च की व्यापक तस्वीर सामने आती है।
हालांकि, सरकारी कर्ज से संबंधित सूचनाओं को लेकर अभी भी कमी बताई गई है। अमेरिका का कहना है कि पाकिस्तान को अपनी वास्तविक वित्तीय स्थिति की पूरी तस्वीर सामने रखने के लिए कर्ज और देनदारियों से जुड़ी जानकारी को और व्यापक बनाना चाहिए।
बजट प्रस्ताव समय पर जारी करने की सलाह
अमेरिका ने पाकिस्तान को कार्यकारी बजट प्रस्ताव निर्धारित समयसीमा के भीतर सार्वजनिक करने की सलाह भी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान का पारित बजट और वित्तीय वर्ष के अंत की रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। इसके अलावा सरकारी वित्तीय जानकारी का लेखा परीक्षण भी किया जाता है।
सेना और खुफिया खर्च पर नागरिक निगरानी की पैरवी
अमेरिकी रिपोर्ट में पाकिस्तान के बजट, सरकारी कर्ज और खास तौर पर सेना तथा खुफिया एजेंसियों पर होने वाले खर्च में पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। अमेरिका चाहता है कि इन मदों में होने वाले खर्च की जानकारी अधिक स्पष्ट रूप से सार्वजनिक हो और संसदीय या नागरिक संस्थाओं की निगरानी व्यवस्था मजबूत की जाए। रिपोर्ट में की गई सिफारिशें पाकिस्तान की वित्तीय व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने और सैन्य तथा खुफिया तंत्र से जुड़े सरकारी खर्च को निगरानी के दायरे में लाने की अमेरिकी अपेक्षा को सामने रखती हैं।





