लद्दाख में ONGC की बड़ी कामयाबी! दूसरे जियोथर्मल कुएं की खुदाई पूरी, भारत के पहले भू-तापीय बिजली संयंत्र की राह हुई आसान

Ladakh

नई दिल्ली: सार्वजनिक क्षेत्र की ऊर्जा कंपनी ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) ने लद्दाख की पुगा घाटी में दूसरे जियोथर्मल कुएं की सफलतापूर्वक खुदाई पूरी कर ली है। इस उपलब्धि को भारत के पहले प्रायोगिक जियोथर्मल बिजली संयंत्र की स्थापना की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। कंपनी का कहना है कि इस सफलता से देश के स्वच्छ ऊर्जा मिशन को नई गति मिलने की उम्मीद है।

करीब एक महीने में पूरी हुई 1,000 मीटर गहरी ड्रिलिंग

ओएनजीसी की अनुसंधान एवं विकास इकाई ओएनजीसी एनर्जी सेंटर ने समुद्र तल से लगभग 14 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित पुगा घाटी में करीब 1,000 मीटर गहराई तक ड्रिलिंग का कार्य लगभग एक महीने में पूरा किया। कंपनी के मुताबिक यह अभियान पहले जियोथर्मल कुएं की तुलना में कम समय और कम लागत में सफलतापूर्वक पूरा किया गया।

पहले कुएं की सफलता के बाद बढ़ीं उम्मीदें

दूसरे जियोथर्मल कुएं की खुदाई पहले कुएं से मिले उत्साहजनक परिणामों के आधार पर की गई। पहले कुएं से उबलते तापमान से अधिक गर्म भाप मिलने के बाद वैज्ञानिकों को इस क्षेत्र में भू-तापीय ऊर्जा की मजबूत संभावनाओं के संकेत मिले थे। अब दूसरे कुएं की सफलता ने इन संभावनाओं को और मजबूती प्रदान की है।

एक मेगावाट के पायलट बिजली संयंत्र की तैयारी

ओएनजीसी के अनुसार दूसरे कुएं से प्राप्त आंकड़े और संसाधन भारत के पहले एक मेगावाट क्षमता वाले प्रायोगिक जियोथर्मल बिजली संयंत्र की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यदि यह परियोजना सफल रहती है तो देश में भू-तापीय ऊर्जा के व्यावसायिक उपयोग का रास्ता भी खुल सकता है।

लद्दाख में चौबीसों घंटे स्वच्छ बिजली देने की योजना

परियोजना के अगले चरण में पायलट बिजली संयंत्र स्थापित किया जाएगा। इसके बाद पुगा घाटी के भू-तापीय संसाधनों का दीर्घकालिक विकास किया जाएगा, ताकि लद्दाख जैसे दुर्गम क्षेत्रों में चौबीसों घंटे विश्वसनीय और स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराई जा सके।

क्या है जियोथर्मल ऊर्जा?

जियोथर्मल ऊर्जा पृथ्वी के भीतर मौजूद प्राकृतिक गर्मी का उपयोग कर बिजली और तापीय ऊर्जा उत्पादन की तकनीक है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह सौर और पवन ऊर्जा की तरह मौसम पर निर्भर नहीं होती और लगातार बिजली उत्पादन करने में सक्षम होती है। इसी कारण इसे भविष्य के भरोसेमंद और टिकाऊ स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों में शामिल किया जाता है।

पुगा घाटी को क्यों माना जाता है सबसे अहम क्षेत्र?

पूर्वी लद्दाख की पुगा घाटी को भारत का सबसे संभावनाशील जियोथर्मल क्षेत्र माना जाता है। यहां कई दशकों से भू-तापीय संसाधनों की खोज और परीक्षण किए जा रहे हैं। हालांकि तकनीकी चुनौतियों और अधिक लागत के कारण अब तक देश में जियोथर्मल ऊर्जा से व्यावसायिक स्तर पर बिजली उत्पादन शुरू नहीं हो पाया है।

2030 के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य को मिलेगा बल

भारत ने वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता हासिल करने का लक्ष्य तय किया है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार सौर, पवन और जलविद्युत के साथ-साथ जियोथर्मल ऊर्जा जैसे वैकल्पिक और टिकाऊ ऊर्जा स्रोतों के विकास पर भी विशेष ध्यान दे रही है। ओएनजीसी की यह उपलब्धि इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

 

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