25 साल पुराने अपहरण केस पर हाईकोर्ट सख्त, बोला- ‘तारीख पर तारीख’ नहीं बन सकती न्याय व्यवस्था की पहचान

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लखनऊ: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 25 साल पुराने अपहरण मामले की सुनवाई करते हुए लंबित मामलों पर कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि लंबे समय तक मुकदमों का लंबित रहना न्याय व्यवस्था की पहचान नहीं बन सकता। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ‘तारीख पर तारीख’ वाला जुमला अदालतों के कामकाज की वास्तविकता नहीं बनना चाहिए।

मामला बहराइच से जुड़ा है, जहां करीब ढाई दशक पहले एक युवती के अपहरण का मुकदमा दर्ज हुआ था। हालांकि समय के साथ परिस्थितियां बदल गईं। आरोपी और कथित पीड़िता ने शादी कर ली और अब दोनों पति-पत्नी के रूप में रह रहे हैं। उनके तीन बच्चे भी हैं और परिवार सामान्य जीवन जी रहा है। इसके बावजूद अपहरण का मुकदमा अब तक अदालत में लंबित था।

25 साल पुराने मामले पर कोर्ट ने जताई नाराजगी

जस्टिस राजीव भारती की पीठ ने आरोपी अजय कुमार और रामचंद्र की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। अदालत को बताया गया कि मामले में जिसे पीड़िता बताया गया था, वह अपनी इच्छा से अजय कुमार के साथ गई थी। बाद में दोनों ने विवाह कर लिया और वर्तमान में पति-पत्नी के रूप में जीवन बिता रहे हैं।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि किसी मामले को दो दशक से अधिक समय तक लंबित रखना नागरिकों को मिले त्वरित न्याय के अधिकार के खिलाफ है। अदालत ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से जुड़ा मामला बताया।

कोर्ट बोला- न्याय को अनिश्चित समय तक नहीं टाला जा सकता

हाईकोर्ट ने बहराइच की ट्रायल कोर्ट में लंबे समय से चल रही सुनवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह मामला ऐसा प्रतीत होता है जैसे अदालत में केवल तारीख देने की औपचारिकता निभाई जा रही थी।

अदालत ने स्पष्ट किया कि न्याय को अनिश्चित समय तक टाला नहीं जा सकता। न्याय जनता का अधिकार है और उसे उचित समय पर मिलना जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक मुकदमों का लंबित रहना न्याय व्यवस्था के उद्देश्य के विपरीत है।

2001 में दर्ज हुआ था अपहरण का मुकदमा

इस मामले में वर्ष 2001 में बहराइच के पयागपुर थाने में अपहरण का केस दर्ज किया गया था। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले के तथ्यों और मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए दोनों आरोपियों को अग्रिम जमानत दे दी।

हाईकोर्ट ने दोनों आरोपियों को निर्देश दिया कि वे पहले ट्रायल कोर्ट के सामने आत्मसमर्पण करें। इसके बाद उन्हें अग्रिम जमानत के आदेश के तहत रिहा किया जाएगा।

‘तारीख पर तारीख’ डायलॉग की हुई चर्चा

सुनवाई के दौरान अदालत की टिप्पणी के बाद फिल्म ‘दामिनी’ का चर्चित संवाद ‘तारीख पर तारीख’ भी चर्चा में आ गया। इस फिल्म में अभिनेता सनी देओल ने वकील की भूमिका निभाते हुए यह संवाद बोला था, जो भारतीय न्याय व्यवस्था में लंबित मामलों को लेकर अक्सर इस्तेमाल किया जाता है।

 

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