भारत-जापान का बड़ा रक्षा समझौता! अब समंदर में दुश्मनों की पकड़ से दूर रहेंगे भारतीय वॉरशिप, मिसाइल और स्टेल्थ टेक्नोलॉजी पर बढ़ा साथ

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नई दिल्ली: भारत और जापान के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंच रही है। अगस्त 2025 से अब तक दोनों देशों के बीच 120 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। जापान भारत में करीब 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश करने जा रहा है। यह निवेश रक्षा, ऊर्जा, ऑटोमोबाइल, इस्पात, सेमीकंडक्टर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अंतरिक्ष जैसे अहम क्षेत्रों में किया जाएगा। इस साझेदारी से भारत के आत्मनिर्भर बनने की दिशा को मजबूती मिलेगी, वहीं जापान को चीन पर अपनी निर्भरता कम करने में भी मदद मिलेगी।

जापान की प्रधानमंत्री सना तकाइची की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को नई दिशा देने पर सहमति जताई। अब तक दोनों देशों के बीच मुख्य रूप से गैर-घातक रक्षा उपकरणों और सीमित तकनीकी सहयोग तक ही साझेदारी थी, लेकिन अब इसे व्यापक रक्षा सहयोग में बदलने की तैयारी की जा रही है।

स्टेल्थ तकनीक से लैस होंगे भारतीय युद्धपोत

नवंबर 2024 में भारत और जापान ने भारतीय नौसेना के युद्धपोतों के लिए यूनिकॉर्न स्टेल्थ एंटीना मास्ट के संयुक्त विकास का समझौता किया था। इस अत्याधुनिक तकनीक का निर्माण भारत में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा किया जा रहा है। इस तकनीक के जरिए युद्धपोतों की पहचान करना दुश्मनों के लिए बेहद कठिन हो जाएगा।

प्रधानमंत्री सना तकाइची की यात्रा के दौरान सबसे बड़ा बदलाव यह सामने आया कि जापान ने अप्रैल 2026 में घातक हथियारों के निर्यात पर लगा प्रतिबंध हटा दिया है। इसके बाद अब जापान भारत को युद्धपोत, मिसाइलें और आधुनिक हथियार प्रणालियां उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके संयुक्त विकास के लिए भी तैयार है।

आर्थिक सुरक्षा पर भी बनी साझा रणनीति

दोनों देशों ने आर्थिक सुरक्षा को लेकर भी साझा घोषणा पर सहमति बनाई है। इस घोषणा में किसी देश का नाम लिए बिना आर्थिक दबाव और जबरदस्ती का मिलकर सामना करने की प्रतिबद्धता जताई गई है। जापानी कंपनियों पर चीन की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों के बाद इस पहल को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मोगामी क्लास फ्रिगेट पर बढ़ेगा सहयोग

जापान अब भारत के साथ मोगामी क्लास फ्रिगेट, आधुनिक मिसाइल सिस्टम और अन्य नौसैनिक रक्षा उपकरणों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार है। दोनों देश संयुक्त उत्पादन और तकनीक हस्तांतरण के विकल्पों पर भी चर्चा कर रहे हैं।

भारत के लिए यह साझेदारी इसलिए अहम मानी जा रही है क्योंकि वह रक्षा क्षेत्र में रूस पर अपनी निर्भरता कम करते हुए अत्याधुनिक और भरोसेमंद तकनीक हासिल करना चाहता है। वहीं जापान भारत को एक बड़े रक्षा बाजार और विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहा है, खासकर ऐसे समय में जब चीन का दबाव लगातार बढ़ रहा है।

क्वाड साझेदारी को भी मिलेगा नया बल

भारत और जापान दोनों क्वाड समूह के सदस्य हैं। पिछले कुछ वर्षों से दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। सना तकाइची की भारत यात्रा ने यह संकेत भी दिया है कि अब दोनों देश अपने रिश्तों को व्यापारिक सहयोग से आगे बढ़ाकर व्यापक रणनीतिक और रक्षा साझेदारी में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

मुख्य रक्षा समझौते और सहयोग के क्षेत्र

भारत और जापान के बीच स्टेल्थ तकनीक आधारित यूनिकॉर्न एंटीना मास्ट का संयुक्त विकास और उत्पादन, युद्धपोतों एवं मिसाइलों सहित घातक हथियारों के निर्यात और संयुक्त विकास, आर्थिक सुरक्षा तथा सप्लाई चेन साझेदारी और रक्षा उत्पादन में तकनीकी सहयोग जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर सहमति बनी है।

चुनौतियां भी बनी हुई हैं

हालांकि इस रणनीतिक साझेदारी के सामने कुछ चुनौतियां भी मौजूद हैं। इससे पहले लागत और तकनीक हस्तांतरण से जुड़े मुद्दों के कारण US-2 एयरक्राफ्ट सौदा आगे नहीं बढ़ सका था। इसके अलावा जापान की वृद्ध होती कार्यशक्ति और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियां भी मौजूद हैं। बावजूद इसके दोनों देश इन बाधाओं को दूर कर दीर्घकालिक रक्षा और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

 

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