ड्रोन की उड़ान से बढ़ा रोजगार का दायरा, खेती से सीमा निगरानी तक तेजी से बढ़ रहा स्वदेशी कारोबार

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नई दिल्ली। भारत में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल बीते कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। पहले मुख्य रूप से फोटो और वीडियो बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले ड्रोन अब खेती, भूमि सर्वेक्षण, सड़क-रेलवे निगरानी, आपदा प्रबंधन और रक्षा जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। बढ़ती मांग के साथ ड्रोन निर्माण, सॉफ्टवेयर, सेंसर, प्रशिक्षण और सर्वेक्षण सेवाओं से जुड़े उद्योगों का भी विस्तार हो रहा है।

भारत का ड्रोन बाजार 2025 में करीब 1.22 अरब डॉलर यानी लगभग 10,977 करोड़ रुपये का था। अनुमान है कि 2030 तक यह बढ़कर 3.23 अरब डॉलर यानी करीब 29,080 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इस दौरान बाजार की औसत सालाना वृद्धि दर 21.51 प्रतिशत रहने का अनुमान है। बाजार का विस्तार केवल ड्रोन की बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि निर्माण और इससे जुड़ी सेवाओं की मांग भी बढ़ रही है।

ड्रोन की बढ़ती उपयोगिता की बड़ी वजह कम समय में बड़े क्षेत्र का सर्वेक्षण और निगरानी करने की क्षमता है। दुर्गम और दूरदराज के इलाकों में भी ड्रोन तस्वीरों और वीडियो के जरिये तेजी से जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं। इसी वजह से सरकारी विभागों के साथ निजी क्षेत्र में भी इनका इस्तेमाल बढ़ा है।

नमो ड्रोन दीदी योजना से महिलाओं के लिए बढ़े अवसर

कृषि क्षेत्र में नमो ड्रोन दीदी योजना ने ड्रोन के इस्तेमाल को नई दिशा दी है। नवंबर 2023 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन उपलब्ध कराना है, ताकि वे किसानों के खेतों में कीटनाशक और अन्य कृषि इनपुट का छिड़काव कर सकें। इससे बड़े क्षेत्र में कम समय में छिड़काव संभव होता है और महिला समूहों के लिए आय का नया जरिया तैयार होता है।

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, लीड फर्टिलाइजर कंपनियों के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों को 1,094 ड्रोन दिए जा चुके हैं।

गांवों के सर्वे में भी ड्रोन का इस्तेमाल

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन से गांवों की आबादी वाली जमीन का सर्वे किया जा रहा है। इसके जरिए सटीक नक्शे और संपत्ति रिकॉर्ड तैयार किए जा रहे हैं। दिसंबर 2025 तक करीब 3.28 लाख गांवों का सर्वे पूरा हो चुका था। वहीं, 1.82 लाख गांवों के लिए 2.76 करोड़ संपत्ति कार्ड तैयार किए जा चुके थे।

हाईवे और रेलवे की निगरानी में भी उपयोग

बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भी ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ा है। हाईवे परियोजनाओं की निगरानी के लिए ड्रोन से वीडियो रिकॉर्डिंग की जा रही है। रेलवे में ट्रैक, पुलों और अन्य ढांचों की निगरानी के अलावा रेलवे यार्ड, स्टेशनों और ट्रैक के आसपास सुरक्षा व्यवस्था पर नजर रखने में भी इनका इस्तेमाल किया जा रहा है।

आपदा प्रबंधन में भी ड्रोन उपयोगी साबित हो रहे हैं। बाढ़ और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों की तस्वीरें और वीडियो जुटाकर राहत एवं बचाव दलों को स्थिति समझने और अभियान की योजना बनाने में मदद मिलती है।

रक्षा क्षेत्र में बढ़ा ड्रोन का महत्व

रक्षा क्षेत्र में ड्रोन का इस्तेमाल सीमा निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और लक्ष्यों की पहचान जैसे कार्यों में बढ़ रहा है। स्रोत के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय ड्रोन और लक्ष्य तक पहुंचकर हमला करने वाले हथियारों का इस्तेमाल किया गया था।

रक्षा क्षेत्र में बढ़ती मांग ने घरेलू कंपनियों के लिए भी बड़ा बाजार तैयार किया है। देश में 600 से अधिक ड्रोन कंपनियां हैं, जिनमें 100 से ज्यादा कंपनियां रक्षा क्षेत्र के लिए ड्रोन विकसित कर रही हैं।

सरकार ने स्वदेशी ड्रोन उद्योग को दिया बढ़ावा

ड्रोन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने नियमों को आसान बनाने के साथ स्वदेशी उत्पादन के लिए पीएलआई योजना लागू की। इसके तहत कंपनियों को मूल्यवर्धन पर 20 प्रतिशत तक प्रोत्साहन दिया गया। सितंबर 2025 में ड्रोन पर जीएसटी घटाकर पांच प्रतिशत किया गया।

इसके साथ ही ड्रोन के स्थानीयकरण को बढ़ाने और घरेलू स्तर पर पुर्जों, सॉफ्टवेयर तथा सेवाओं के विकास पर जोर दिया जा रहा है।

ड्रोन उद्योग में बढ़ रहे रोजगार के अवसर

9 फरवरी 2026 तक देश में 38,575 ड्रोन पंजीकृत थे और 39,890 रिमोट पायलट प्रमाणपत्र जारी किए जा चुके थे। ड्रोन क्षेत्र में रोजगार के अवसर केवल पायलट तक सीमित नहीं हैं। निर्माण, सॉफ्टवेयर, सेंसर, मरम्मत, डेटा विश्लेषण और भूमि सर्वेक्षण जैसे क्षेत्रों में भी काम के अवसर बढ़ रहे हैं। आने वाले वर्षों में ड्रोन उद्योग के विस्तार के साथ विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर बढ़ने की संभावना है।

 

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