हिमालय पर मंडरा रहा बड़ा खतरा! भूटान की हिमनद झीलों से तबाही की चेतावनी, 11 हजार से ज्यादा लोगों पर संकट

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नई दिल्ली: जलवायु परिवर्तन का प्रभाव हिमालयी क्षेत्र में तेजी से गहराता जा रहा है। बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण तेजी से पिघल रहे ग्लेशियर अब एक नए खतरे को जन्म दे रहे हैं। ग्लेशियरों से बनने वाली हिमनद झीलें भविष्य में बड़ी प्राकृतिक आपदा का कारण बन सकती हैं। एक नए अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि यदि भूटान की किसी जोखिम वाली हिमनद झील का प्राकृतिक बांध टूटता है तो कुछ ही घंटों में बड़े पैमाने पर तबाही फैल सकती है।

ब्रिटेन की न्यूकैसल यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में आधुनिक मॉडलिंग तकनीकों की मदद से संभावित ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) और उसके प्रभावों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है। इस शोध के निष्कर्ष प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका नेचुरल हैजर्ड्स एंड अर्थ सिस्टम साइंसेज में प्रकाशित किए गए हैं।

पहली बार इतने व्यापक स्तर पर किया गया जोखिम का विश्लेषण

शोधकर्ताओं ने केवल हिमनद झीलों की स्थिति का अध्ययन नहीं किया, बल्कि यह भी आकलन किया कि यदि किसी झील का प्राकृतिक बांध टूटता है तो बाढ़ का पानी किन-किन क्षेत्रों तक पहुंचेगा और वहां रहने वाले लोगों तथा बुनियादी ढांचे पर उसका कितना असर पड़ेगा।

इस अध्ययन में ज्यूरिख यूनिवर्सिटी, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) और नेपाल स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (आईसीआईएमओडी) के वैज्ञानिक भी शामिल रहे। शोधकर्ताओं के अनुसार यह पहला ऐसा अध्ययन है, जिसमें संभावित जनहानि के साथ-साथ बुनियादी ढांचे को होने वाले नुकसान का भी समग्र मूल्यांकन किया गया है।

11 हजार से ज्यादा लोगों की जान पर खतरा

अध्ययन के मुताबिक, यदि ग्लेशियर झील विस्फोट की स्थिति बनती है तो 11,000 से अधिक लोग सीधे इसकी चपेट में आ सकते हैं। इसके अलावा 2,500 से ज्यादा इमारतें, 250 किलोमीटर से अधिक सड़क नेटवर्क, करीब 20 वर्ग किलोमीटर कृषि भूमि और 400 से अधिक पुल संभावित बाढ़ से प्रभावित हो सकते हैं।

वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसी आपदा केवल भवनों और संपत्तियों को नुकसान नहीं पहुंचाएगी, बल्कि परिवहन व्यवस्था, कृषि गतिविधियों, स्थानीय आजीविका और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर प्रभाव डालेगी।

जलवायु परिवर्तन बढ़ा रहा हिमालय की चुनौती

विशेषज्ञों के अनुसार हिमालयी क्षेत्र में लगातार बढ़ते तापमान के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। इसके चलते नई हिमनद झीलों का निर्माण हो रहा है, जबकि पहले से मौजूद झीलों का आकार भी लगातार बढ़ रहा है। यही वजह है कि ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) जैसी घटनाओं का खतरा पहले की तुलना में काफी बढ़ गया है।

शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि संभावित आपदाओं से बचाव के लिए जोखिम वाली हिमनद झीलों की नियमित निगरानी, प्रभावी प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित करना और संवेदनशील इलाकों में समय रहते मजबूत आपदा प्रबंधन व्यवस्था लागू करना बेहद जरूरी है।

 

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