अडानी-US सेटलमेंट की बड़ी तैयारी! केस खत्म करने के बदले 10 अरब डॉलर निवेश और 15 हजार नौकरियों का प्रस्ताव

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वॉशिंगटन : अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी को लेकर अमेरिका में चल रहे कानूनी मामलों में बड़ा मोड़ आता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका का न्याय विभाग गौतम अडानी पर लगे रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी से जुड़े आपराधिक मामलों को वापस लेने की तैयारी कर रहा है। इसके बदले अडानी समूह की ओर से अमेरिका में 10 अरब डॉलर निवेश और 15 हजार नई नौकरियां देने का प्रस्ताव सामने आया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, यह मामला अमेरिका और भारत दोनों में कारोबारी और राजनीतिक हलकों में तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है।

क्या है पूरा मामला?

साल 2024 के आखिर में अमेरिकी शेयर बाजार नियामक SEC ने गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर अडानी पर गंभीर आरोप लगाए थे। दोनों उस समय अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड में शीर्ष पदों पर थे।

SEC का आरोप था कि भारत में एक बड़े सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट का ठेका हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को करोड़ों डॉलर की रिश्वत देने का वादा किया गया था।

इसके साथ ही अमेरिकी निवेशकों से अरबों डॉलर का फंड जुटाते समय यह दावा किया गया कि कंपनी में रिश्वतखोरी रोकने के लिए सख्त नियम लागू हैं। SEC के मुताबिक, निवेशकों से कथित तौर पर महत्वपूर्ण जानकारी छिपाना अमेरिकी कानून के तहत धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है।

सेटलमेंट के तहत कितना जुर्माना?

कोर्ट में दाखिल दस्तावेजों के अनुसार, प्रस्तावित समझौते के तहत गौतम अडानी 60 लाख डॉलर का जुर्माना भर सकते हैं, जबकि सागर अडानी पर 1 करोड़ 20 लाख डॉलर यानी करीब 12 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया जा सकता है।

हालांकि इस समझौते की अहम बात यह बताई जा रही है कि इसमें अडानी पक्ष किसी भी आरोप या अपराध को स्वीकार नहीं करेगा। अडानी समूह पहले भी इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बता चुका है।

क्रिमिनल केस भी हो सकते हैं खत्म

न्यूयॉर्क में गौतम अडानी और सागर अडानी पर धोखाधड़ी और साजिश रचने के आपराधिक मामले भी दर्ज किए गए थे। लेकिन अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब इन मामलों को भी खत्म करने पर विचार किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में राजनीतिक बदलाव और नई नीतियों का असर इस पूरे मामले पर दिखाई दे रहा है।

ट्रंप सरकार के फैसले से बदला माहौल

रिपोर्ट्स के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद हालात तेजी से बदले। मार्च 2025 में ट्रंप प्रशासन ने फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेस एक्ट यानी FCPA पर रोक लगा दी थी।

यह कानून विदेशी व्यापार और अमेरिकी निवेशकों से जुड़े मामलों में रिश्वतखोरी रोकने के लिए लागू किया गया था। माना जा रहा है कि इसी फैसले के बाद अडानी के खिलाफ चल रहा मामला कमजोर पड़ने लगा।

10 अरब डॉलर निवेश और 15 हजार नौकरियों का प्रस्ताव

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2026 में अडानी समूह की लीगल टीम ने वॉशिंगटन में अमेरिकी न्याय विभाग के अधिकारियों से मुलाकात की थी।

इस दौरान प्रस्ताव रखा गया कि यदि अमेरिका केस खत्म करता है, तो अडानी समूह अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 10 अरब डॉलर का निवेश करेगा। इसके जरिए करीब 15 हजार नई नौकरियां पैदा होने का भी दावा किया गया।

बताया जा रहा है कि यह निवेश ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक क्षेत्रों में किया जा सकता है।

ट्रंप के निजी वकील की एंट्री से बढ़ी चर्चा

इस पूरे मामले में एक बड़ा मोड़ तब आया जब गौतम अडानी ने अपने बचाव के लिए नई लीगल टीम नियुक्त की। इस टीम का नेतृत्व अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निजी वकील रॉबर्ट जे. गिफ्रा जूनियर कर रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, न्याय विभाग के अधिकारियों के सामने करीब 100 स्लाइड का प्रेजेंटेशन दिया गया, जिसमें दावा किया गया कि जांच एजेंसियों के पास अडानी के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं और अमेरिका का अधिकार क्षेत्र भी स्पष्ट नहीं बनता।

इसी प्रेजेंटेशन में बाद में 10 अरब डॉलर निवेश और रोजगार सृजन का प्रस्ताव भी रखा गया।

अमेरिकी अधिकारियों का क्या रहा रुख?

हालांकि अमेरिकी न्याय विभाग और सरकारी वकीलों की ओर से कहा गया कि निवेश प्रस्ताव का कानूनी फैसले पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक बैठक में मौजूद कुछ अधिकारियों ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी थी।

बताया जा रहा है कि इसके बाद ही मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया तेज हुई।

अडानी समूह का कारोबार लगातार बढ़ा

गौतम अडानी ने 1990 के दशक में कोयला कारोबार से अपनी शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने ग्रीन एनर्जी, रक्षा, लॉजिस्टिक्स और कृषि समेत कई क्षेत्रों में तेजी से विस्तार किया।

अडानी समूह का दावा है कि उसका क्लीन एनर्जी पोर्टफोलियो 20 गीगावाट से अधिक का हो चुका है। कंपनी का लक्ष्य 2030 तक इस क्षेत्र में दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल होना है।

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