मिस्र के डामिएटा पोर्ट पर अमेरिकी गैस टैंकर में धमाका, ड्रोन हमले का दावा; मिडिल ईस्ट तनाव के बीच बढ़ी चिंता

0301

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच मिस्र के रणनीतिक महत्व वाले डामिएटा पोर्ट पर खड़े एक अमेरिकी गैस टैंकर में विस्फोट और आग लगने की घटना सामने आई है। कुछ रिपोर्टों में इस घटना को ड्रोन हमले से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि मिस्र के अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर ड्रोन हमले की पुष्टि नहीं की है। घटना के बाद ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।

बताया गया है कि ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा फर्म के अनुसार अमेरिकी फ्लोटिंग स्टोरेज टैंकर ‘एनर्जोस विंटर’ को निशाना बनाया गया। विस्फोट के बाद लगी आग पास में मौजूद एलएनजी वाहक ‘गैसलाग सेलम’ और एक टगबोट तक फैल गई। दमकल टीमों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया और सभी नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

ट्रंप ने ईरान को दी सख्त चेतावनी

घटना के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कड़ी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दोहराई। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के खिलाफ बेहद सख्त कदम उठाने के लिए तैयार है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कूटनीतिक समाधान की संभावना अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

ट्रंप ने रूस पर प्रस्तावित प्रतिबंधों से जुड़े विधेयक में ईरान पर भी शुल्क लगाने की वकालत करते हुए कहा कि इससे कानून और अधिक प्रभावी हो सकता है।

मिस्र ने आग की पुष्टि की, हमले पर नहीं दिया बयान

मिस्र के पेट्रोलियम मंत्री करीम बदावी घटना के बाद डामिएटा पोर्ट पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। मिस्र के पेट्रोलियम एवं खनिज संसाधन मंत्रालय ने पुष्टि की कि आपातकालीन टीमों ने आग पर सफलतापूर्वक काबू पा लिया है। हालांकि मंत्रालय ने यह स्पष्ट नहीं किया कि आग किसी ड्रोन हमले की वजह से लगी थी या किसी अन्य कारण से। अब तक किसी संगठन ने इस घटना की जिम्मेदारी भी नहीं ली है।

क्यों अहम है ‘एनर्जोस विंटर’ जहाज

जिस जहाज के प्रभावित होने की बात कही जा रही है, वह फ्लोटिंग स्टोरेज एंड रीगैसिफिकेशन यूनिट (एफएसआरयू) है। इसकी एलएनजी भंडारण क्षमता लगभग 1,38,250 घन मीटर बताई जाती है। यह तरलीकृत प्राकृतिक गैस को दोबारा प्राकृतिक गैस में बदलकर पाइपलाइन और ऊर्जा नेटवर्क तक पहुंचाने में सक्षम है। जहाज का स्वामित्व अमेरिकी कंपनी के पास है, जबकि इसके तकनीकी, सुरक्षा और वाणिज्यिक संचालन की जिम्मेदारी एक अंतरराष्ट्रीय शिप प्रबंधन कंपनी संभालती है।

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच घटना

यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब मध्य पूर्व में सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, इससे पहले अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित समूहों के ठिकानों पर संयुक्त कार्रवाई की थी। वहीं ईरान ने भी दावा किया कि उसने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागीं और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को निशाना बनाया। इसके अलावा ईरान ने रणनीतिक जलमार्ग के संयुक्त प्रशासन से जुड़े एक प्रस्ताव को भी अस्वीकार कर दिया है।

उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने हालिया घटनाक्रम के बीच फिर दोहराया कि यदि जरूरत पड़ी तो अमेरिका ईरान के खिलाफ सख्त सैन्य कार्रवाई करेगा। हालांकि, आधिकारिक स्तर पर कूटनीतिक प्रयासों की संभावना भी बरकरार बताई जा रही है।

 

----------------------------------------------------------------------------------------------

एक नज़र