सऊदी अरब ने बदला तेल निर्यात का रास्ता, यूरोप को अगले महीने नहीं मिलेगा क्रूड; जानें क्या है वजह

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दुबई: सऊदी अरब ने तेल निर्यात के लिए अपना रास्ता बदल दिया है। जानकारी के मुताबिक, सऊदी अरब ने करीब 60 मिलियन बैरल कच्चा तेल अपने गल्फ पोर्ट रास तयनूरा से ओमान के सोहार पोर्ट भेजने का फैसला किया है। यह तेल जहाजों के जरिए ट्रांसफर किया जाएगा। यह व्यवस्था इस महीने और अगले महीने के लिए की गई है। लाल सागर में सऊदी अरब के तेल निर्यात मार्ग में आ रही रुकावटों के बाद यह कदम उठाया गया है, ताकि अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक तेल की आपूर्ति जारी रखी जा सके।

इस बीच सऊदी अरामको ने कम से कम दो यूरोपीय रिफाइनिंग ग्राहकों को बताया है कि उन्हें अगले महीने सऊदी अरब से कच्चे तेल की सप्लाई नहीं मिलेगी। इसकी वजह लाल सागर में उस पाइपलाइन पर हुआ हमला बताया गया है, जिसका इस्तेमाल सऊदी तेल निर्यात के लिए करता है।

ओमान के रास्ते चीन और दक्षिण कोरिया को मिल रहा तेल

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, खाड़ी से सऊदी अरब के निर्यात में आंशिक सुधार ने वैश्विक तेल कीमतों को कुछ नीचे आने में मदद की है। अब कारोबारी यह आकलन कर रहे हैं कि ओमान के रास्ते भेजी जा रही अतिरिक्त मात्रा यानबू में आपूर्ति में आई कमी की भरपाई कितनी कर सकती है।

चीन और दक्षिण कोरिया की रिफाइनरियां उन प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं, जो ओमान के रास्ते स्पॉट कार्गो ले रही हैं। वहीं, कुछ तेल की आपूर्ति भारत और जापान की ओर जाने की उम्मीद है।

ड्रोन हमले से पाइपलाइन को नुकसान, मरम्मत में लग सकते हैं 3 से 5 हफ्ते

सऊदी अरब की एक महत्वपूर्ण तेल पाइपलाइन पर ड्रोन हमला होने के बाद क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत के चलते इसके कई हफ्तों तक लगभग बंद रहने की बात सामने आई है। क्षेत्र के दो अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि पाइपलाइन की मरम्मत में समय लग सकता है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के समुद्री मार्गों के आसपास और द्वीपों पर कब्जा कर लिया है। इससे सऊदी अरब के तेल निर्यात पर दबाव और बढ़ गया है। वैश्विक पेट्रोलियम आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच तेल की कीमतों में 2 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी भी दर्ज की गई।

मामले से परिचित अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि एक प्रमुख पंपिंग केंद्र समेत पाइपलाइन को हुए नुकसान की मरम्मत में 3 से 5 सप्ताह लग सकते हैं। एक अधिकारी के मुताबिक, मरम्मत के दौरान पाइपलाइन आंशिक रूप से काम कर सकती है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि उस दौरान कितनी मात्रा में तेल भेजा जा सकेगा।

ईरान से तनाव के बीच बदला तेल निर्यात मार्ग

ईरान के साथ तनाव के बीच सऊदी अरब ने फारस की खाड़ी से होने वाले तेल निर्यात को दूसरे रास्ते की ओर मोड़ दिया है। ईरान के हमलों के कारण खाड़ी से बाहर निकलने वाले प्रमुख समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही प्रभावित होने की बात कही गई है।

सऊदी अरब करीब 1,200 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के जरिए खाड़ी के बंदरगाहों से कच्चा तेल लाल सागर स्थित यानबू बंदरगाह तक पहुंचाता है। हालांकि, गुरुवार को हुए हमले के बाद अधिकारियों को पाइपलाइन बंद करनी पड़ी। सऊदी अरब ने इस हमले के लिए ईरान समर्थित इराकी मिलिशिया के ड्रोन को जिम्मेदार ठहराया है।

पाइपलाइन से रोजाना 26 से 40 लाख बैरल तेल की आपूर्ति

नॉर्वे की शोध कंपनी रिस्टैड एनर्जी के सोमवार को जारी विश्लेषण के अनुसार, अगस्त के अंत से इस पाइपलाइन के जरिए रोजाना औसतन 26 लाख से 40 लाख बैरल तेल भेजा जा रहा था। कंपनी के मुताबिक, अगर पाइपलाइन से तेल की आपूर्ति पूरी तरह रुक जाती है तो इतनी मात्रा में तेल बाजार तक नहीं पहुंच पाएगा।

रिस्टैड एनर्जी ने कहा कि ब्रेंट क्रूड की कीमत बढ़कर 109 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि बाजार में आपूर्ति में बड़ी कमी की आशंका बढ़ रही है। पाइपलाइन का संचालन करने वाली सऊदी अरामको ने इस मामले पर टिप्पणी के अनुरोध का तत्काल जवाब नहीं दिया।

 

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