पैलेट गन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: RAF के हथियारों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का आदेश, घायल प्रदर्शनकारियों के इलाज के भी निर्देश
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने नीट प्रश्नपत्र लीक के विरोध में जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल से जुड़े मामले में केंद्र सरकार को महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। शीर्ष अदालत ने कहा है कि उस दिन तैनात रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) द्वारा इस्तेमाल किए गए हथियारों का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए। साथ ही दिल्ली सरकार को पैलेट से घायल हुए प्रदर्शनकारियों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया गया है।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर की दलीलों पर विचार किया। अदालत ने केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को निर्देश दिया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान आरएएफ के हथियारों के उपयोग से संबंधित सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं।
पैलेट गन पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग पर कोर्ट ने उठाए सवाल
यह याचिका पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त और सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद तथा पैलेट से घायल हुए दो लोगों की ओर से दायर की गई है। याचिका में कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के दौरान पूरी तरह या आंशिक रूप से धातुयुक्त पैलेट गोलियों के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (बीपीआरडी) की सलाह के अनुसार असाधारण परिस्थितियों में पुलिस को पैलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति है।
20 जुलाई की घटना पर होगी सुनवाई
पीठ ने स्पष्ट किया कि वह 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल से जुड़े घटनाक्रम की सुनवाई करने के लिए तैयार है।
घायलों को बेहतर इलाज देने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान पैलेट लगने से घायल हुए लोगों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि उनके उपचार में किसी प्रकार की कमी न रहे।
जनहित याचिका में मुआवजे और पुनर्वास की भी मांग
अनुच्छेद 32 के तहत दायर जनहित याचिका में याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि 20 जुलाई को मध्य दिल्ली में आयोजित “संसद चलो” प्रदर्शन के दौरान वे पैलेट लगने से घायल हुए थे। याचिका में घटना से प्रभावित सभी लोगों को उचित मुआवजा, समुचित चिकित्सा सुविधा और पुनर्वास उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि भीड़ नियंत्रण के लिए पंप-एक्शन या प्रोजेक्टाइल-एक्शन गन से दागी जाने वाली धातुयुक्त पैलेट गोलियां बल प्रयोग से जुड़े संवैधानिक मानकों के अनुरूप नहीं हैं और इनके इस्तेमाल पर रोक लगाई जानी चाहिए।





