लखनऊ को मिलेगा नया सुपर स्पेशियलिटी सरकारी अस्पताल! एबीवीएमयू में बनेगा 400 बेड का टीचिंग हॉस्पिटल, 100 MBBS सीटों का भी रास्ता साफ
लखनऊ: राजधानी लखनऊ में स्वास्थ्य सुविधाओं को बड़ा विस्तार मिलने जा रहा है। अटल बिहारी वाजपेई मेडिकल यूनिवर्सिटी (एबीवीएमयू) परिसर में 400 बेड का अत्याधुनिक टीचिंग अस्पताल स्थापित करने की तैयारी तेज हो गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसके लिए विस्तृत प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। अस्पताल बनने से सुलतानपुर रोड और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को बेहतर सरकारी इलाज की सुविधा मिलेगी। कैंसर संस्थान के बाद यह इस इलाके का दूसरा प्रमुख सरकारी अस्पताल होगा। कुलपति डॉ. अमित देवगन के अनुसार, अस्पताल का संचालन विश्वविद्यालय के अधीन स्थापित होने वाले मेडिकल कॉलेज के माध्यम से किया जाएगा।
25 से अधिक विभागों में मिलेगी आधुनिक चिकित्सा सुविधा
प्रस्तावित अस्पताल में 25 से अधिक चिकित्सा विभाग स्थापित किए जाएंगे। इनमें मेडिसिन, जनरल सर्जरी, अस्थि रोग, त्वचा रोग, नेत्र रोग, ईएनटी, श्वास एवं फेफड़ा रोग, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, डेंटल, रेडियोलॉजी और पैथोलॉजी सहित कई प्रमुख विभाग शामिल होंगे। इन विभागों के माध्यम से मरीजों को एक ही परिसर में व्यापक उपचार, आधुनिक जांच और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने की योजना है।
100 एमबीबीएस सीटों वाले मेडिकल कॉलेज की भी तैयारी
विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. देवाशीष शुक्ला ने बताया कि अस्पताल के निर्माण के साथ ही मेडिकल कॉलेज की स्थापना का रास्ता भी साफ हो जाएगा। प्रस्ताव के अनुसार यहां एमबीबीएस की 100 सीटों पर प्रवेश शुरू करने की योजना है। इसके अलावा नर्सिंग और पैरामेडिकल पाठ्यक्रमों का संचालन भी किया जाएगा, जिससे प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा को मजबूती मिलने के साथ प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या भी बढ़ेगी।
इलाज, चिकित्सा शिक्षा और शोध का बनेगा प्रमुख केंद्र
कुलपति डॉ. अमित देवगन ने बताया कि वर्तमान में अटल बिहारी वाजपेई मेडिकल यूनिवर्सिटी प्रदेश के मेडिकल, नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेजों को संबद्धता प्रदान करने के साथ विभिन्न पाठ्यक्रमों की परीक्षाएं आयोजित कराती है। अस्पताल और मेडिकल कॉलेज शुरू होने के बाद विश्वविद्यालय केवल संबद्धता देने वाली संस्था नहीं रहेगा, बल्कि चिकित्सा शिक्षा, शोध और मरीजों के इलाज का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरेगा।
अस्पताल शुरू होने के बाद राजधानी में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा और मजबूत होगा। मेडिकल छात्रों को आधुनिक टीचिंग अस्पताल में प्रशिक्षण मिलेगा, वहीं मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा एक ही परिसर में उपलब्ध होगी। इससे शहर के अन्य बड़े सरकारी अस्पतालों पर मरीजों का दबाव कम होने की भी उम्मीद है।





