दशहरे पर इन 7 जगहों पर नहीं जलाया जाता रावण का पुतला, कहीं दामाद तो कहीं पूर्वज मानकर होती है पूजा

00000-14 (1)
नई दिल्ली: देशभर में विजयादशमी यानी दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इस दिन कई जगहों पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। हालांकि, भारत में कुछ ऐसे स्थान भी हैं, जहां रावण का पुतला जलाने के बजाय उसकी पूजा की जाती है। इन परंपराओं के पीछे स्थानीय इतिहास, धार्मिक मान्यताएं और पीढ़ियों से चली आ रही आस्थाएं जुड़ी हैं। कहीं रावण को दामाद माना जाता है, तो कहीं उसे पूर्वज और भगवान शिव का परम भक्त मानकर सम्मान दिया जाता है।

1. बिसरख गांव, उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में स्थित बिसरख गांव का संबंध रावण के परिवार से जोड़ा जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, यह रावण के पिता ऋषि विश्रवा से जुड़ा स्थान है। इसी वजह से गांव में रावण को विशेष सम्मान दिया जाता है।

दशहरे के दिन यहां रावण का पुतला जलाने के बजाय उसकी पूजा-अर्चना की जाती है। गांव में रावण का एक मंदिर भी है, जहां श्रद्धालु अपनी मान्यताओं के अनुसार पूजा करते हैं।

2. मंदसौर, मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के मंदसौर में भी रावण की पूजा की परंपरा प्रचलित है। मान्यता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी इसी क्षेत्र की रहने वाली थीं। इसी वजह से मंदसौर को रावण का ससुराल कहा जाता है।

स्थानीय परंपरा में दामाद को सम्मान देने की मान्यता के चलते रावण की पूजा की जाती है। इसी कारण यहां के कुछ इलाकों में विजयादशमी पर रावण का पुतला जलाने के बजाय उसकी पूजा-अर्चना होती है।

3. रावनग्राम, मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश के विदिशा से करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित रावनग्राम में भी दशहरे पर रावण के पुतले का दहन नहीं किया जाता। यहां के लोगों की आस्था में रावण का विशेष स्थान है। गांव में उसकी विशाल प्रतिमा स्थापित होने की बात भी कही जाती है।

रावनग्राम की यह परंपरा बताती है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में रामायण के पात्रों को लेकर स्थानीय मान्यताएं और धार्मिक परंपराएं अलग-अलग हो सकती हैं।

4. कानपुर, उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश के कानपुर में स्थित दशानन मंदिर रावण की पूजा के लिए प्रसिद्ध है। बताया जाता है कि इस मंदिर का इतिहास करीब 135 साल पुराना है। मंदिर के कपाट सालभर खुले नहीं रहते, बल्कि दशहरे के दिन श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोले जाते हैं।

अन्य दिनों में रावण की प्रतिमा ढकी रहती है। विजयादशमी के अवसर पर भक्त मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और तेल के दीपक जलाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धालु रावण से बुद्धि, ज्ञान और शक्ति की कामना करते हैं।

5. जोधपुर, राजस्थान

राजस्थान के जोधपुर में कुछ समुदाय रावण को अपना पूर्वज मानते हैं। इनकी मान्यताओं में रावण का संबंध वंश परंपरा से जुड़ा हुआ है। इसी वजह से दशहरे के अवसर पर ये लोग रावण का पुतला जलाने के बजाय उसकी पूजा करते हैं।

यहां रावण से जुड़ी आस्था आम तौर पर प्रचलित रावण दहन की परंपरा से अलग है। स्थानीय समुदायों के लिए यह उनकी सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक मान्यताओं का हिस्सा है।

6. काकिनाडा, आंध्र प्रदेश

आंध्र प्रदेश के काकिनाडा में रावण को समर्पित एक मंदिर है। यहां रावण को पराक्रमी शासक और भगवान शिव का परम भक्त माना जाता है। मंदिर में रावण के साथ भगवान शिव की पूजा किए जाने की परंपरा भी बताई जाती है।

स्थानीय मान्यताओं में रावण की शिवभक्ति और उसके सामर्थ्य को महत्व दिया जाता है। इसी वजह से यहां उसे देखने का नजरिया उन स्थानों से अलग है, जहां विजयादशमी पर रावण के पुतले का दहन किया जाता है।

7. कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में भी रावण को लेकर अलग धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। यहां कुछ स्थानों पर रावण को भगवान शिव का बड़ा उपासक मानकर सम्मान दिया जाता है।

मान्यता है कि रावण ने कठोर तपस्या करके भगवान शिव को प्रसन्न किया था और उनकी कृपा प्राप्त की थी। कुछ स्थानीय परंपराओं में यह भी माना जाता है कि रावण को मोक्ष मिला था। इसी आस्था के चलते यहां कुछ लोग दशहरे पर उसका पुतला जलाने के बजाय पूजा-अर्चना करते हैं।

 

----------------------------------------------------------------------------------------------

एक नज़र