सोने की ज्वेलरी खरीदना महंगा, हॉलमार्किंग फीस 45 से बढ़कर 75 रुपये; 18% GST भी देना होगा

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नई दिल्ली: सोने की कीमतों में तेजी के बीच ज्वेलरी खरीदने वालों की लागत एक और वजह से बढ़ गई है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने सोने के आभूषणों की हॉलमार्किंग फीस में करीब 66.7% की बढ़ोतरी की है। अब प्रति आभूषण हॉलमार्किंग शुल्क 45 रुपये से बढ़कर 75 रुपये हो गया है। नई दर 14 सितंबर से लागू हो चुकी है। इस शुल्क पर 18% GST अलग से लगेगा, जिसके बाद हॉलमार्किंग का कुल खर्च 88.50 रुपये प्रति आभूषण हो जाएगा। वहीं, चांदी की हॉलमार्किंग फीस में कोई बदलाव नहीं हुआ है और यह 35 रुपये प्रति आर्टिकल बनी हुई है।

वजन के हिसाब से नहीं, हर आभूषण पर लगेगा शुल्क

हॉलमार्किंग शुल्क आभूषण के वजन के आधार पर नहीं लिया जाता, बल्कि प्रत्येक आर्टिकल के हिसाब से तय होता है। यानी एक ग्राम की अंगूठी हो या उससे अधिक वजन का आभूषण, हॉलमार्किंग शुल्क 75 रुपये प्रति आर्टिकल ही रहेगा।

इसका असर हल्के वजन वाले आभूषणों पर तुलनात्मक रूप से ज्यादा पड़ सकता है। कम वजन की अंगूठी, नोज पिन, चेन या दूसरी ज्वेलरी पर 75 रुपये का शुल्क प्रति ग्राम के हिसाब से अधिक लागत बन सकता है। त्योहारी सीजन में हल्के आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों के लिए यह अतिरिक्त खर्च खास तौर पर मायने रखता है।

18% GST के बाद 88.50 रुपये होगा शुल्क

BIS की उपभोक्ता जागरूकता सामग्री में हॉलमार्किंग शुल्क पर 18% GST का उल्लेख है। 75 रुपये की मौजूदा फीस पर 18% GST के तौर पर 13.50 रुपये जुड़ेंगे। इस तरह हॉलमार्किंग से जुड़ा कुल खर्च 88.50 रुपये प्रति आभूषण होगा।

हालांकि, हॉलमार्किंग शुल्क को आभूषण की कीमत से अलग समझना जरूरी है। यह शुल्क आभूषण के मूल्य का हिस्सा नहीं, बल्कि हॉलमार्किंग के लिए लिया जाने वाला अलग चार्ज है।

ज्वेलर्स बोले- बढ़ी लागत का असर ग्राहक पर पड़ सकता है

कूचा महाजनी, चांदनी चौक स्थित ऑल बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश सिंघल के मुताबिक, हॉलमार्किंग समेत दूसरे शुल्क और टैक्स का भार अंततः किसी न किसी रूप में ग्राहक तक पहुंचता है। उनका कहना है कि कारोबार में बढ़ने वाला कोई भी खर्च उत्पाद की लागत को प्रभावित करता है और इसका असर ग्राहक की जेब पर पड़ सकता है।

2021 में 256 जिलों से शुरू हुई थी अनिवार्य हॉलमार्किंग

देश में सोने के आभूषणों की अनिवार्य हॉलमार्किंग व्यवस्था जून 2021 में 256 जिलों से शुरू की गई थी। इसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से दूसरे जिलों में भी लागू किया गया।

मार्च 2026 में छठे चरण के तहत 7 और जिले हॉलमार्किंग के दायरे में शामिल किए गए। इसके बाद अनिवार्य हॉलमार्किंग व्यवस्था वाले जिलों की संख्या बढ़कर 380 हो गई। इस तरह पिछले कुछ वर्षों में हॉलमार्किंग व्यवस्था का दायरा लगातार बढ़ा है और अब प्रति आर्टिकल शुल्क बढ़ने से सोने के आभूषण खरीदने वालों की लागत भी बढ़ गई है।

 

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