राष्ट्रपति का ADC बनना कितना मुश्किल? 14 दिन चलता है इंटरव्यू, ऐसे चुने जाते हैं सबसे बेहतरीन सैन्य अधिकारी

ADC

नई दिल्ली: राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति के साथ साए की तरह नजर आने वाले सैन्य अधिकारियों को देखकर अक्सर सवाल उठता है कि आखिर ये अधिकारी कौन होते हैं और राष्ट्रपति के एडीसी यानी Aide-de-Camp तक कैसे पहुंचते हैं। यह पद भारतीय सेना के सबसे प्रतिष्ठित और जिम्मेदारी वाले पदों में शामिल है। ‘नेशनल क्रश’ के नाम से चर्चित रहे मेजर ऋषभ सिंह संब्याल के एडीसी पद से अचानक इस्तीफे के बाद एक बार फिर इस पद की चयन प्रक्रिया को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ गई है।

राज शमानी के साथ बातचीत में मेजर ऋषभ सिंह संब्याल ने राष्ट्रपति के एडीसी की चयन प्रक्रिया और इस पद की जिम्मेदारियों से जुड़ी कई अहम बातें बताईं। उन्होंने बताया कि एक सामान्य सैन्य अधिकारी से राष्ट्रपति भवन तक पहुंचने का रास्ता बेहद कठिन, अनुशासित और कड़े परीक्षणों से होकर गुजरता है।

कौन बन सकता है राष्ट्रपति का ADC?

राष्ट्रपति का एडीसी पद किसी सामान्य भर्ती प्रक्रिया के जरिए नहीं भरा जाता। आम नागरिक इस पद के लिए सीधे आवेदन नहीं कर सकते। भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना के कमिशंड अधिकारी ही इसके लिए पात्र होते हैं।

सेना में कमिशंड अधिकारी बनने के लिए युवाओं को यूपीएससी की NDA या CDS जैसी कठिन परीक्षाएं पास करनी होती हैं। सैन्य अधिकारी के रूप में करीब 5 से 7 साल की सेवा पूरी करने के बाद उनके सेवा रिकॉर्ड, शारीरिक क्षमता और गोपनीय रिपोर्ट यानी ACR जैसे मानकों के आधार पर एडीसी पद के लिए नाम शॉर्टलिस्ट किए जाते हैं।

तीनों सेनाओं से कुल मिलाकर करीब 20 से 30 बेहतरीन अधिकारियों को चयन प्रक्रिया के शुरुआती चरण के लिए चुना जाता है। यानी एडीसी बनने की दौड़ में शामिल होने से पहले ही अधिकारी के लिए अपनी यूनिट में बेहतर प्रदर्शन करना जरूरी होता है।

पहले सर्विस हेडक्वॉर्टर में इंटरव्यू, फिर राष्ट्रपति भवन की परीक्षा

एडीसी के चयन की प्रक्रिया बेहद कठिन मानी जाती है। शुरुआती स्क्रीनिंग में चुने गए अधिकारियों को संबंधित सर्विस हेडक्वॉर्टर के इंटरव्यू से गुजरना होता है। इस दौरान करेंट अफेयर्स, सिचुएशनल अवेयरनेस और कई अन्य विषयों पर उनकी क्षमता परखी जाती है।

इसके बाद केवल 5 अधिकारियों को दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन बुलाया जाता है। यहां चयन प्रक्रिया का सबसे कठिन चरण शुरू होता है, जिसमें लगातार 14 दिनों तक मैराथन इंटरव्यू चलता है।

14 दिन तक उम्मीदवारों की कमजोरियां तलाशता है पैनल

मेजर ऋषभ सिंह संब्याल के मुताबिक, राष्ट्रपति भवन में वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और राष्ट्रपति के सचिव उम्मीदवारों को काफी मानसिक दबाव में परखते हैं। इसका मकसद यह समझना होता है कि दबाव और आपात स्थिति में अधिकारी किस तरह प्रतिक्रिया देता है।

उन्होंने बताया कि अगर किसी उम्मीदवार की जियोपॉलिटिक्स या किसी अन्य विषय में कमजोरी नजर आती है तो पैनल उसी विषय से जुड़े सवाल बार-बार पूछ सकता है। खास बात यह होती है कि 14 दिनों के दौरान उम्मीदवारों को उनकी कमियों के बारे में सीधे नहीं बताया जाता।

इसके बजाय यह देखा जाता है कि उम्मीदवार रात में अपनी कमी को समझकर तैयारी करता है या नहीं और अगले दिन उसी विषय पर बेहतर प्रदर्शन कर पाता है या नहीं। इस प्रक्रिया के जरिए केवल ज्ञान नहीं, बल्कि सीखने की क्षमता और दबाव में खुद को सुधारने की योग्यता भी परखी जाती है।

ADC बनने के बाद निजी जिंदगी से भी करना पड़ता है समझौता

मेजर ऋषभ के अनुसार, राष्ट्रपति का एडीसी होना जितना प्रतिष्ठित है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी है। इस पद पर रहते हुए अधिकारी को अपने परिवार और निजी जीवन से काफी हद तक दूरी बनानी पड़ती है।

राष्ट्रपति के साथ लगातार मौजूद रहने के कारण सामान्य दिनचर्या और निजी जीवन के लिए समय बेहद सीमित हो जाता है। अधिकारी को हर समय सतर्क रहना होता है और देश-दुनिया की घटनाओं से लगातार अपडेट रहना भी उनकी जिम्मेदारियों का हिस्सा होता है।

शान के पीछे छिपा है कड़ा अनुशासन

राष्ट्रपति का एडीसी बनना सैन्य अधिकारी के लिए सम्मान और गौरव की बात माना जाता है। लेकिन इस प्रतिष्ठित जिम्मेदारी तक पहुंचने के लिए कठोर चयन प्रक्रिया, मानसिक दबाव, निरंतर सतर्कता और निजी जीवन से समझौता करना पड़ता है।

यही वजह है कि राष्ट्रपति के एडीसी का पद केवल प्रोटोकॉल निभाने या राष्ट्रपति के साथ चलने तक सीमित नहीं है। यह ऐसी जिम्मेदारी है, जिसमें अधिकारी को हर पल राष्ट्रपति की सुरक्षा, जरूरतों और परिस्थितियों के प्रति पूरी तरह सजग रहना होता है।

 

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