ईरान का बड़ा दावा: होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन को मिसाइल से मार गिराया, 54वां ड्रोन नष्ट करने का दावा
दुनिया के अहम तेल मार्ग पर बढ़ सकता है तनाव
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। यहां से हर दिन लाखों बैरल तेल गुजरता है। अमेरिकी ड्रोन इस क्षेत्र में टैंकरों की सुरक्षा और निगरानी के लिए उड़ान भरते हैं। ऐसे में ईरान का यह दावा क्षेत्र में तनाव बढ़ा सकता है। दोनों देशों के बीच फरवरी 2026 से जारी संघर्ष में ड्रोन और वायु रक्षा प्रणालियों की भूमिका अहम बनी हुई है।
अमेरिका अब तक कम से कम 45 रीपर ड्रोन खो चुका है
वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी से अब तक अमेरिका कम से कम 45 MQ-9 रीपर ड्रोन गंवा चुका है। इस आंकड़े में दुश्मन की गोलीबारी, दुर्घटनाओं, अपने ही पक्ष की गोलीबारी और ईरान से दूर हुई घटनाएं भी शामिल हैं। हालांकि, इन आंकड़ों के आधार पर ईरान के ताजा दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं होती है।
एक ड्रोन की कीमत 30 से 50 मिलियन डॉलर तक
MQ-9 रीपर ड्रोन की कीमत करीब 3 करोड़ से 5 करोड़ डॉलर के बीच बताई जाती है। रिपोर्ट में दिए गए नुकसान के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिकी ड्रोन बेड़े को कुल मिलाकर 1.3 अरब डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ है। ये ड्रोन निगरानी के साथ सटीक हमले करने के लिए भी इस्तेमाल किए जाते हैं। होर्मुज जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इनकी भूमिका टैंकरों की गतिविधियों पर नजर रखने और सुरक्षा अभियानों में महत्वपूर्ण है।
अमेरिकी कांग्रेस की रिपोर्टों में भी ड्रोन के नुकसान का जिक्र किया गया है। इनमें बताया गया है कि सक्रिय रीपर ड्रोन की संख्या पहले के मुकाबले काफी घट गई है। यह स्थिति दिखाती है कि लंबे समय तक उड़ान भरने में सक्षम और महंगे ड्रोन भी मजबूत वायु रक्षा वाले क्षेत्रों में निशाना बन सकते हैं।
ईरान ने अपनी वायु रक्षा मजबूत होने का किया दावा
ईरान ने पिछले सप्ताह ब्लूमबर्ग से कहा था कि उसकी वायु रक्षा क्षमता वसंत में हुए संघर्ष के समय की तुलना में काफी मजबूत हो गई है। IRGC के अनुसार, नए रक्षा उपकरणों और एकीकृत नेटवर्क की मदद से अमेरिकी ड्रोन को खोजने और निशाना बनाने की क्षमता बढ़ी है।
वसंत के संघर्ष के दौरान ईरान की कई रक्षा प्रणालियां क्षतिग्रस्त हुई थीं। इसके बाद मरम्मत और नए उपकरणों को शामिल करके उनकी निगरानी क्षमता बढ़ाने का दावा किया गया है। यदि ईरान का दावा सही साबित होता है, तो अमेरिका को अपने रीपर ड्रोन की सुरक्षा के लिए उनकी उड़ान की ऊंचाई, मार्ग और इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव करने पड़ सकते हैं।
होर्मुज में तनाव का असर तेल और वैश्विक व्यापार पर भी संभव
होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य तनाव बढ़ने का असर केवल दोनों देशों के बीच संघर्ष तक सीमित नहीं रह सकता। इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से तेल आपूर्ति और वैश्विक व्यापार पर असर पड़ सकता है। इससे तेल की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव की आशंका पैदा हो सकती है।
अमेरिका के लिए ड्रोन का लगातार नुकसान भविष्य के सैन्य अभियानों की योजना को प्रभावित कर सकता है, जबकि ईरान ऐसे दावों को अपनी रक्षा क्षमता के प्रदर्शन के रूप में पेश कर रहा है। हालांकि, इस तरह की घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है, क्योंकि दोनों पक्षों के दावों में अंतर बना हुआ है।





