बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर लगेगी रोक? नॉर्वे में 16 साल से कम उम्र वालों के लिए सख्त कानून की तैयारी, कंपनियों पर भी बढ़ेगी जिम्मेदारी

Untitled-139-e1792478220474

नई दिल्ली: बच्चों को इंटरनेट की दुनिया में सुरक्षित रखने के लिए नॉर्वे सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है। सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल और कुछ ऑनलाइन सेवाओं तक उनकी पहुंच सीमित करने के लिए कानून लाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। प्रस्ताव के दायरे में सोशल मीडिया के साथ संदेश भेजने और ऑनलाइन गेम खेलने वाले मंच भी आ सकते हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस योजना का उद्देश्य बच्चों को इंटरनेट पर मौजूद संभावित खतरों से बचाना है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि किन-किन मंचों और सेवाओं पर प्रतिबंध लागू होगा।

टिकटॉक, स्नैपचैट और रोब्लॉक्स पर भी पड़ सकता है असर

प्रस्तावित कानून के तहत ऐसे डिजिटल मंचों को प्रतिबंध के दायरे में लाया जा सकता है, जिन्हें बच्चों के लिए नुकसानदायक माना जाता है। इस संदर्भ में टिकटॉक, स्नैपचैट और रोब्लॉक्स जैसे लोकप्रिय मंचों का उल्लेख किया गया है।

हालांकि, नॉर्वे सरकार ने अभी तक प्रतिबंध के दायरे में आने वाले सभी ऐप और ऑनलाइन सेवाओं की अंतिम सूची जारी नहीं की है। ऐसे में इन मंचों पर प्रतिबंध लगना फिलहाल तय नहीं है। कानून का वास्तविक स्वरूप और उसका दायरा विधेयक के प्रावधान सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

16 साल की उम्र तक सोशल मीडिया इस्तेमाल सीमित करने की तैयारी

नॉर्वे सरकार ने इससे पहले अप्रैल में संकेत दिया था कि इस विषय पर साल के अंत तक संसद में विधेयक पेश किया जा सकता है। प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य 16 साल की उम्र पूरी होने तक बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को नियंत्रित करना है।

सरकार की चिंता है कि कम उम्र में डिजिटल मंचों का अत्यधिक इस्तेमाल बच्चों की सुरक्षा और विकास से जुड़े जोखिम बढ़ा सकता है। इसी वजह से उम्र के आधार पर नियम बनाने पर विचार किया जा रहा है, ताकि बच्चों को ऑनलाइन दुनिया के संभावित नुकसान से बचाया जा सके।

उम्र की जांच नहीं की तो कंपनियों पर हो सकती है कार्रवाई

प्रस्तावित कानून में सोशल मीडिया और संबंधित सेवाएं उपलब्ध कराने वाली कंपनियों की जिम्मेदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके तहत कंपनियों को उपयोगकर्ताओं की उम्र की पुष्टि करने के लिए व्यवस्था लागू करनी पड़ सकती है।

यदि कंपनियां उम्र की जांच से जुड़ी जिम्मेदारियों का पालन नहीं करती हैं, तो उन पर जुर्माना लगाने या अन्य कार्रवाई करने का प्रावधान किया जा सकता है। हालांकि, नियमों के उल्लंघन पर दंड किस तरह तय होगा और उन्हें लागू करने की प्रक्रिया क्या होगी, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

ऑस्ट्रेलिया पहले ही उठा चुका है बड़ा कदम

बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर उम्र आधारित पाबंदियां लगाने की दिशा में नॉर्वे अकेला देश नहीं है। ऑस्ट्रेलिया भी इस मामले में कदम उठा चुका है। वहां 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर प्रतिबंध से जुड़े नियम लागू किए गए हैं। इसके चलते संबंधित कंपनियों को उम्र की पुष्टि करने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था करनी पड़ी है।

फेसबुक और स्नैपचैट जैसे मंच भी इस तरह के नियमों से प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा ऑस्ट्रिया, ब्राजील और कनाडा जैसे देशों में भी बच्चों की डिजिटल गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग स्तर पर कानूनी पहल की गई है।

बच्चों की सुरक्षा के साथ निजता बनाए रखना भी चुनौती

बच्चों के सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग इस्तेमाल पर उम्र के आधार पर रोक लगाने की योजना के सामने कई चुनौतियां भी हैं। इनमें सबसे अहम है उपयोगकर्ताओं की उम्र की सही पहचान करना और नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करना।

इसके साथ ही उम्र की पुष्टि के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं में बच्चों की निजता की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा। अब नजर नॉर्वे सरकार के प्रस्तावित विधेयक पर है। संसद में विधेयक पेश होने और उसके प्रावधान स्पष्ट होने के बाद ही पता चलेगा कि किन सेवाओं पर प्रतिबंध लगेगा और कंपनियों को किन शर्तों का पालन करना होगा।

 

----------------------------------------------------------------------------------------------

एक नज़र