LPG सिलेंडर में बची गैस की बर्बादी होगी खत्म! नए प्लान से हर साल ₹21,900 करोड़ की बचत का दावा
नई दिल्ली: देश में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों में बची रह जाने वाली गैस की बर्बादी रोकने के लिए बड़ा बदलाव शुरू हो गया है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियां अब कमर्शियल और औद्योगिक उपभोक्ताओं को पारंपरिक वाष्प आधारित सिलेंडरों की जगह तरल एलपीजी (लिक्विड ऑफ-टेक) सिलेंडर अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। इस पहल का उद्देश्य ईंधन की बर्बादी रोकना, दक्षता बढ़ाना और गैस का पूरा उपयोग सुनिश्चित करना है।
देशभर में हर दिन करीब 40 लाख कमर्शियल सिलेंडरों का उपयोग होता है। इनमें अधिकांश पारंपरिक वाष्प आधारित सिलेंडर हैं। इन सिलेंडरों में पूरी गैस का उपयोग नहीं हो पाता और लगभग 1 किलोग्राम गैस सिलेंडर में ही बच जाती है। इसका परिणाम यह होता है कि रोजाना करीब 4,000 टन एलपीजी व्यर्थ चली जाती है, जो सालभर में लगभग 1.46 मिलियन टन के बराबर होती है।
क्या है नया बदलाव?
ऑयल मार्केटिंग कंपनियां अब ऐसे लिक्विड एलपीजी सिलेंडरों को बढ़ावा दे रही हैं, जिनमें गैस लगभग पूरी तरह उपयोग हो जाती है। इस तकनीक से उपभोक्ताओं को खरीदी गई गैस का पूरा लाभ मिलता है। इसे पारंपरिक प्रणाली की तुलना में अधिक किफायती और सुरक्षित भी माना जा रहा है।
₹21,900 करोड़ सालाना बचत का दावा
यदि देश के सभी कमर्शियल उपभोक्ता इस नई व्यवस्था को अपनाते हैं, तो हर वर्ष लगभग 21,900 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है। यह दावा पुणे गैस सिस्टम्स ने पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को भेजे गए पत्र में किया है।
कीमत में नहीं है कोई अंतर
लिक्विड ऑफ-टेक (LOT) और पारंपरिक वाष्प आधारित (VOT) सिलेंडरों की कीमत समान है। इंडियन ऑयल की वेबसाइट पर उपलब्ध नवीनतम दरों के अनुसार, दिल्ली में 47.5 किलोग्राम क्षमता वाले दोनों प्रकार के सिलेंडरों की कीमत 7,332 रुपये है। वहीं, 19 किलोग्राम क्षमता वाले LOT सिलेंडर और सामान्य कमर्शियल सिलेंडर दोनों की कीमत 2,930 रुपये है।
सरकार और कंपनियां अब दे रही हैं प्राथमिकता
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 47.5 किलोग्राम वाले लिक्विड एलपीजी सिलेंडरों को वर्ष 2007 में ही अपनी उत्पाद सूची में शामिल कर लिया था, लेकिन पहले इन्हें व्यापक स्तर पर बढ़ावा नहीं दिया गया। अब कंपनियां इन सिलेंडरों की आपूर्ति को प्राथमिकता दे रही हैं और देशभर में 1,000 से अधिक संस्थान इन्हें अपनाना शुरू कर चुके हैं।
पुणे गैस सिस्टम्स की कार्यकारी निदेशक जेसल संपत के अनुसार, तेल कंपनियों के सहयोग से इस तकनीक को लागू करने के बाद ग्राहकों के बीच इसकी मांग लगातार बढ़ी है और अब यह बदलाव देशभर में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।





