पेट्रोल से भी सस्ता ईंधन बना रहा भारत! गोबर से तैयार हो रही बायो-सीएनजी, किसानों की बढ़ रही कमाई
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है, जिससे पेट्रोल-डीजल समेत अन्य ईंधनों की लागत पर भी असर पड़ा है। ऐसे समय में भारत वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर तेजी से काम कर रहा है। गुजरात के बनासकांठा में पशुओं के गोबर से तैयार की जा रही बायो-सीएनजी अब पेट्रोल का सस्ता विकल्प बनकर सामने आ रही है। यह परियोजना न केवल ईंधन लागत कम करने में मदद कर रही है, बल्कि किसानों की अतिरिक्त आय का भी जरिया बन रही है।
हर दिन सैकड़ों वाहनों को मिल रहा बायो-सीएनजी ईंधन
सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन और बनास डेयरी के सहयोग से संचालित बनासकांठा का बायो-सीएनजी स्टेशन प्रतिदिन लगभग 600 से 700 वाहनों को ईंधन उपलब्ध करा रहा है। इस संयंत्र में पशुओं के गोबर से मीथेन गैस तैयार कर उसे बायो-सीएनजी में परिवर्तित किया जाता है।
पेट्रोल के मुकाबले कम है कीमत
रिपोर्ट के अनुसार इस बायो-सीएनजी की कीमत करीब 80 रुपये प्रति किलोग्राम है, जो देश के कई हिस्सों में पेट्रोल की तुलना में 20 रुपये से भी अधिक सस्ती बताई गई है। संयंत्र के लिए प्रतिदिन 16 गांवों से करीब 88 टन गोबर एकत्र किया जाता है। किसानों को इसके बदले लगभग 1 रुपये प्रति किलोग्राम का भुगतान किया जाता है, जिससे उनकी अतिरिक्त आय भी सुनिश्चित हो रही है।
ऐसे काम करता है पूरा मॉडल
इस परियोजना में बनास डेयरी गांवों से गोबर खरीदती है, जबकि सुजुकी मोटर पूंजी निवेश और वाहनों की मांग उपलब्ध कराती है। बुखाला गांव के एक पशुपालक प्रतिदिन लगभग 400 किलोग्राम गोबर संयंत्र को बेचते हैं, जिससे उन्हें खेती की आय के अलावा अतिरिक्त आमदनी होती है। वहीं, तैयार बायो-सीएनजी का उपयोग वे अपने सीएनजी वाहनों में भी कर रहे हैं।
सिर्फ सस्ता ईंधन ही नहीं, जैविक खाद भी मिल रही
इस परियोजना का एक बड़ा लाभ यह भी है कि गोबर से गैस निकालने के बाद बचा अवशेष जैविक खाद के रूप में तैयार किया जाता है। इसे आसपास के किसानों को उपलब्ध कराया जाता है। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी मदद मिलने की बात कही गई है।
ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में अहम पहल
भारत पहले से ही नगर निगम के गीले कचरे, कृषि अवशेष और चारा फसलों से भी बायो-सीएनजी का उत्पादन कर रहा है। इंदौर में सार्वजनिक बसें बायोगैस से संचालित की जा रही हैं। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के बीच ऐसे वैकल्पिक ईंधनों का विस्तार ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बड़ी कंपनियां भी बढ़ा रही निवेश
बायो-सीएनजी क्षेत्र में ऑटोमोबाइल और ऊर्जा क्षेत्र की कई बड़ी कंपनियां निवेश कर रही हैं। सीएनजी वाहनों के विस्तार के साथ बायोगैस उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए नई योजनाओं पर भी काम जारी है। हाल ही में जापान यात्रा के दौरान हुए रणनीतिक समझौते के तहत देश में 1,000 नए बायोगैस संयंत्र स्थापित करने की दिशा में भी पहल तेज हुई है।
उत्पादन बढ़ाना अब भी सबसे बड़ी चुनौती
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि बायो-सीएनजी उत्पादन को बड़े स्तर तक पहुंचाना अभी भी चुनौती बना हुआ है। देश में प्राकृतिक गैस की दैनिक खपत के मुकाबले वर्तमान बायो-सीएनजी उत्पादन काफी कम है। इसके अलावा गोबर का संग्रह, संयंत्र तक परिवहन और गैस की आपूर्ति जैसी व्यवस्थाएं भी लागत बढ़ाती हैं। ऐसे में इस क्षेत्र के विस्तार के लिए उत्पादन क्षमता और आधारभूत ढांचे को मजबूत करना जरूरी माना जा रहा है।





