AI से लैस ‘काल भैरव’ बढ़ाएगा भारत की सैन्य ताकत, चीन-पाकिस्तान के लिए बनेगा नई चुनौती

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नई दिल्ली : भारत रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ा और अहम कदम उठाने जा रहा है। देश का पहला आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कॉम्बैट एयरक्राफ्ट ‘काल भैरव’ जल्द निर्माण चरण में प्रवेश करने वाला है। इस अत्याधुनिक परियोजना को भारतीय एआई वारफेयर कंपनी एफडब्ल्यूडीए और पुर्तगाल की कंपनी स्केचपिक्सल के सहयोग से विकसित किया जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक, इस एयरक्राफ्ट का शुरुआती निर्माण पुर्तगाल में किया जाएगा। परियोजना के तहत स्केचपिक्सल एडवांस सिमुलेशन सिस्टम और प्रशिक्षण तकनीक उपलब्ध कराएगी, जबकि एफडब्ल्यूडीए एयरफ्रेम डिजाइन और ऑटोनोमस एआई सिस्टम तैयार करेगी।

AI तकनीक से लैस होगा ‘काल भैरव’

‘काल भैरव’ को आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया जा रहा है। इसमें नेविगेशन, लक्ष्य की पहचान, हमला और मिशन समन्वय जैसी क्षमताएं पूरी तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित होंगी। माना जा रहा है कि यह एयरक्राफ्ट बिना पायलट के भी कई जटिल सैन्य मिशनों को अंजाम देने में सक्षम होगा।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य के युद्धों में ऑटोनोमस और एआई संचालित हथियार प्रणालियां निर्णायक भूमिका निभाएंगी और ‘काल भैरव’ इसी दिशा में भारत की बड़ी तैयारी मानी जा रही है।

क्या होंगी ‘काल भैरव’ की खास क्षमताएं?

इस अत्याधुनिक एयरक्राफ्ट में लंबी दूरी और लंबे समय तक मिशन ऑपरेशन की क्षमता दी जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक इसकी ऑपरेशनल रेंज करीब 3000 किलोमीटर होगी।

यह लगातार 25 से 30 घंटे तक उड़ान भर सकेगा, जबकि युद्ध जैसी स्थिति में लगभग 11 घंटे तक सक्रिय मिशन ऑपरेशन करने में सक्षम होगा। एयरक्राफ्ट 15 हजार फीट तक की ऊंचाई पर उड़ान भर सकेगा और लगभग 91 किलोग्राम तक पेलोड ले जाने की क्षमता रखेगा।

इसके अलावा इसमें एआई आधारित टारगेटिंग सिस्टम और ऑटोमैटिक मिशन कंट्रोल फीचर भी मौजूद होंगे। इसकी क्रूज स्पीड करीब 42 मीटर प्रति सेकंड बताई जा रही है, जिससे यह लंबी दूरी के सैन्य अभियानों में प्रभावी साबित हो सकता है।

ड्रोन और AI युद्ध के दौर में भारत का बड़ा कदम

हाल के वर्षों में रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में हुए संघर्षों ने यह साफ कर दिया है कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होने वाली है।

इसी को देखते हुए भारत अब स्वॉर्म ड्रोन, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिस्टम और ऑटोनोमस एयरक्राफ्ट तकनीक पर तेजी से काम कर रहा है। ‘काल भैरव’ परियोजना को इसी रणनीतिक तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है।

अमेरिकी MQ-9 रीपर से काफी सस्ता होगा ‘काल भैरव’

रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के MQ-9 रीपर ड्रोन की लागत करीब 1000 करोड़ रुपये मानी जाती है, जबकि ‘काल भैरव’ की अनुमानित लागत लगभग 100 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

कम लागत, स्वदेशी सप्लाई चेन और एआई आधारित क्षमताओं के कारण इसे भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बड़ी संख्या में ऐसे एयरक्राफ्ट भारतीय सेना में शामिल किए जाते हैं, तो सीमावर्ती इलाकों में निगरानी, सामरिक ऑपरेशन और सुरक्षा क्षमता कई गुना बढ़ सकती है इसके साथ ही यह परियोजना भारत को रक्षा निर्यात और स्वदेशी सैन्य तकनीक के क्षेत्र में नई पहचान भी दिला सकती है।

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