पैनिक बटन के बिना नहीं मिलेगा फिटनेस सर्टिफिकेट, सुप्रीम कोर्ट का पब्लिक वाहनों पर बड़ा आदेश

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नई दिल्ली : सड़क सुरक्षा और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और सख्त निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने कहा है कि टैक्सी, बस और अन्य सार्वजनिक सेवा वाहनों को तब तक फिटनेस सर्टिफिकेट जारी न किया जाए, जब तक उनमें पैनिक बटन और व्हीकल ट्रैकिंग डिवाइस यानी वीएलटीडी नहीं लगाए जाते। अदालत ने साफ कहा कि यह कदम खासतौर पर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्ग यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि तकनीक आधारित सुरक्षा व्यवस्था से आपातकालीन स्थितियों में तेजी से मदद पहुंचाई जा सकेगी और अपराध व हादसों पर भी काफी हद तक लगाम लग सकती है।

क्या होता है पैनिक बटन?

पैनिक बटन एक इमरजेंसी सुरक्षा फीचर होता है, जिसका इस्तेमाल किसी खतरे या आपात स्थिति में किया जाता है। यदि किसी यात्री को सफर के दौरान खतरा महसूस हो, वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाए या मेडिकल इमरजेंसी जैसी स्थिति बन जाए, तो इस बटन को दबाकर तुरंत मदद मांगी जा सकती है।

पैनिक बटन दबाते ही वाहन की जीपीएस लोकेशन सीधे कंट्रोल रूम, पुलिस या इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम तक पहुंच जाती है, जिससे राहत टीम तुरंत सक्रिय हो सकती है।

वाहनों में कहां लगाया जाता है यह बटन?

आमतौर पर पैनिक बटन वाहन की सीट के पास, दरवाजे के आसपास या पिलर पर लगाया जाता है, ताकि जरूरत पड़ने पर यात्री आसानी से इसका इस्तेमाल कर सकें। अधिकतर मामलों में यह लाल रंग का छोटा बटन होता है, जिसे आसानी से पहचाना जा सके।

किन परिस्थितियों में किया जा सकता है इस्तेमाल?

अगर वाहन किसी सुनसान इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हो जाए और मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध न हो, तो पैनिक बटन के जरिए तुरंत मदद बुलाई जा सकती है।

सफर के दौरान यदि कोई यात्री खुद को असुरक्षित महसूस करे, ड्राइवर अभद्र व्यवहार करे या कोई व्यक्ति जबरन वाहन में घुसने की कोशिश करे, तो इस बटन का इस्तेमाल कर पुलिस या सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट किया जा सकता है। महिलाओं के लिए इसे एक अहम सुरक्षा फीचर माना जा रहा है।

मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में भी यह सिस्टम बेहद उपयोगी हो सकता है। यदि चालक या यात्री की अचानक तबीयत बिगड़ जाए, तो पैनिक बटन दबाकर एम्बुलेंस और मेडिकल सहायता तुरंत बुलाई जा सकती है।

व्हीकल ट्रैकिंग डिवाइस कैसे करता है काम?

सुप्रीम कोर्ट ने व्हीकल ट्रैकिंग डिवाइस यानी वीएलटीडी को लेकर भी निर्देश दिए हैं। यह एक स्मार्ट ट्रैकिंग सिस्टम होता है, जो वाहन की लाइव लोकेशन लगातार मॉनिटर करता रहता है। यह सिस्टम कंट्रोल रूम और इमरजेंसी नेटवर्क से सीधा जुड़ा होता है।

जैसे ही पैनिक बटन दबाया जाता है, वाहन की सटीक लोकेशन तुरंत संबंधित एजेंसियों तक पहुंच जाती है। इससे पुलिस, एम्बुलेंस और सुरक्षा एजेंसियों को मौके पर जल्दी पहुंचने में मदद मिलती है। टैक्सी, बस और कैब जैसी सार्वजनिक गाड़ियों में यह तकनीक यात्रियों की सुरक्षा को और मजबूत बना सकती है।

क्या इससे यात्रियों की सुरक्षा बढ़ेगी?

हालांकि इस व्यवस्था के प्रभाव को लेकर अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी सार्वजनिक सेवा वाहनों में पैनिक बटन और व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम को सख्ती से लागू किया जाए, तो यात्रियों की सुरक्षा में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार इससे महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा सुरक्षित माहौल मिल सकता है। साथ ही छेड़छाड़, अपराध और सड़क हादसों जैसी घटनाओं में भी तेजी से मदद पहुंचाकर कई जानें बचाई जा सकती हैं।