रक्षा उत्पादन में भारत ने रचा इतिहास, पहली बार 1.78 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचा आंकड़ा, निजी कंपनियों ने बनाया नया रिकॉर्ड

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नई दिल्ली: भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश का रक्षा उत्पादन पहली बार 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। पिछले वित्त वर्ष की तुलना में इसमें 15.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इस उपलब्धि में निजी रक्षा कंपनियों की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण रही है।

निजी क्षेत्र का अब तक का सबसे बड़ा योगदान

आंकड़ों के अनुसार, कुल रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र का योगदान करीब 42 हजार करोड़ रुपये रहा, जो अब तक का सबसे बड़ा स्तर है। रक्षा उत्पादन में निजी कंपनियों की बढ़ती हिस्सेदारी को भारत के रक्षा उद्योग के तेजी से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अहम उपलब्धि माना जा रहा है।

नई रक्षा नीति और बढ़ती जरूरतों से मिला उद्योग को बढ़ावा

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना के लिए आधुनिक हथियारों और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों की मांग में तेजी आई। इसके साथ ही सरकार की नई रक्षा खरीद प्रक्रिया (डीएपी-2026) में किए गए बदलावों ने निजी क्षेत्र के लिए नए अवसर तैयार किए हैं। नई व्यवस्था के तहत रक्षा खरीद प्रक्रिया को सरल बनाया गया है और स्वदेशी सामग्री की न्यूनतम अनिवार्य हिस्सेदारी बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दी गई है।

निजी कंपनियों को मिले हजारों करोड़ रुपये के बड़े ठेके

देश की प्रमुख निजी रक्षा कंपनियां अब केवल कलपुर्जों के निर्माण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आधुनिक हथियार प्रणालियों के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

भारत फोर्ज को 2.55 लाख से अधिक क्लोज क्वार्टर बैटल कार्बाइन की आपूर्ति के लिए 1,661.9 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है। इसके अलावा कंपनी को 184 एडवांस्ड टोव्ड आर्टिलरी गन सिस्टम की आपूर्ति के लिए 4,140 करोड़ रुपये का एक और बड़ा अनुबंध प्राप्त हुआ है।

वहीं, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और भारत फोर्ज संयुक्त रूप से करीब 6,900 करोड़ रुपये की एडवांस्ड टोव्ड आर्टिलरी गन सिस्टम परियोजना पर काम कर रहे हैं, जिसे देश के सबसे बड़े स्वदेशी तोप खरीद कार्यक्रमों में शामिल माना जा रहा है।

इसके अलावा टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, लार्सन एंड टुब्रो और अडानी डिफेंस ड्रोन, मानव रहित युद्ध प्रणालियों, नौसैनिक उपकरणों और आधुनिक हथियारों के निर्माण में तेजी से अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहे हैं। करीब 30 हजार करोड़ रुपये की मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस ड्रोन परियोजना के लिए भी इन कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा बनी हुई है।

रक्षा निर्यात भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात भी रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसमें लगभग 45 प्रतिशत योगदान निजी कंपनियों का रहा। भारत में निर्मित ब्रह्मोस मिसाइल के पुर्जे, पिनाका रॉकेट प्रणाली, ड्रोन और अन्य आधुनिक रक्षा उपकरण अब 80 से अधिक देशों को निर्यात किए जा रहे हैं।

स्टार्टअप और एमएसएमई भी बने आत्मनिर्भर भारत की ताकत

सरकार की आईडीईएक्स योजना के माध्यम से सैकड़ों स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम भी रक्षा उत्पादन से जुड़ चुके हैं। ये कंपनियां आधुनिक हथियारों और रक्षा प्रणालियों के लिए आवश्यक तकनीक और उपकरण विकसित कर रही हैं। रक्षा क्षेत्र में निजी उद्योग, स्टार्टअप और एमएसएमई की बढ़ती भागीदारी भारत को वैश्विक रक्षा उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में मजबूत स्थिति दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

 

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