G7 समिट में पीएम मोदी ने उठाया भारतीय नाविकों की मौत का मुद्दा, ट्रंप समेत विश्व नेताओं के सामने जताई समुद्री सुरक्षा पर चिंता
नई दिल्ली: जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक समुद्री सुरक्षा का मुद्दा जोरदार ढंग से उठाते हुए ओमान की खाड़ी में हुई घटना में भारतीय नाविकों की मौत पर चिंता व्यक्त की। कनाडा में आयोजित सम्मेलन के संपर्क सत्र में उन्होंने विश्व नेताओं के समक्ष कहा कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आज वैश्विक प्राथमिकता बन चुका है और इसमें सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में पैदा हुई अस्थिरता और समुद्री व्यापार पर पड़े प्रभाव ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि हालिया तनावपूर्ण घटनाओं के कारण भारतीय नागरिकों की जान भी गई है, जो गंभीर चिंता का विषय है।
समुद्री व्यापार की सुरक्षा पर दिया जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले समुद्री व्यापार को सुरक्षित रखना बेहद आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि समुद्री मार्गों पर कार्यरत नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि वे बिना किसी भय और जोखिम के अपना दायित्व निभा सकें।
भारतीय नाविकों की मौत के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठा मामला
पिछले सप्ताह ओमान तट के समीप एक वाणिज्यिक जहाज पर हुई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में चालक दल के तीन भारतीय सदस्यों की मौत हुई थी। इस घटना के बाद भारत में व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिली। अब प्रधानमंत्री मोदी ने इस मुद्दे को सीधे जी-7 जैसे वैश्विक मंच पर उठाकर समुद्री सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है।
पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी जताई चिंता
‘नई साझेदारियां और वैश्विक एकजुटता के पुनर्निर्माण’ विषय पर आयोजित सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत क्षेत्र में शांति स्थापना के प्रयासों का समर्थन करता है, लेकिन हालिया संघर्षों के कारण कई देशों को जान-माल का भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
भरोसे को बताया सबसे बड़ी रणनीतिक पूंजी
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में बदलते वैश्विक परिदृश्य में देशों के बीच विश्वास और सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज ऊर्जा, खाद्य, स्वास्थ्य, साइबर सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता जैसे विषय किसी एक देश तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि ये वैश्विक साझेदारी से जुड़े मुद्दे बन चुके हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में दुनिया पहले से कहीं अधिक परस्पर जुड़ी हुई है और ऐसे समय में देशों के बीच भरोसा सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक पूंजी के रूप में उभरकर सामने आया है।
ग्लोबल साउथ की बढ़ती भूमिका का किया उल्लेख
प्रधानमंत्री मोदी ने ग्लोबल साउथ के देशों की बढ़ती भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विकासशील देश अब केवल सहायता प्राप्त करने वाले राष्ट्र नहीं रह गए हैं, बल्कि वैश्विक विकास, नीति निर्माण और निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाना चाहते हैं। उन्होंने इन देशों की आकांक्षाओं और योगदान को वैश्विक मंचों पर उचित प्रतिनिधित्व मिलने की आवश्यकता बताई।



